कितनी सुंदर, रंग-बिरंगी चहकती सी है ये दुनिया
@ रंजना यादव, बलिया, यूपी… सोचा बहुतफ़िर सोचा की लौट आऊं दुनिया की तरफया खुदा ये क्या गुनाह सोचा हमने
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@ रंजना यादव, बलिया, यूपी… सोचा बहुतफ़िर सोचा की लौट आऊं दुनिया की तरफया खुदा ये क्या गुनाह सोचा हमने
Read Moreशब्द मसीहा केदारनाथ… अस्पताल में वह काउंटर पर पेमेंट जमा करा रहा था कि उसकी पत्नी का फोन आया, “अरे!
Read More✍🏻 मीना सिंह राठौर, नोएडा उत्तर प्रदेश, वो मेरी ग़ज़ल पढ़ कर, पहलु बदल के बोले !!कोई इससे कलम छीन
Read More@ वर्षा गलपांडे, नागपुर,महाराष्ट्र… सर्वप्रथम अपने मात-तात को पूजूं,पश्चात् ही जग में दूजा काम करूं। सौम्या एक गृहणी है, जिसके
Read Moreशब्द मसीहा केदारनाथ… (Shabd masiha Kedarnath) घर में आई हुई ननद को भाभी ने बड़े ही प्यार से ग्यारह सौ
Read Moreशब्द मसीहा केदारनाथ… आज बाबू जी बहुत खुशी-खुशी घर लौटे थे। चेहरे पर दिनभर काम करने की थकान भी रोज
Read More@ मीनाक्षी गर्ग… पथ के पत्थर ही तो होते हैं,जो हमे संभल कर चलना सिखाते हैं,कोमल मिट्टी पर तो अक्सर,पैर
Read More@ मान बहादुर सिंह “मानू”… उसने मुझे फल,फूलऔर रहने के लिए छांव दियामैं उदास था जिस रोजउसने मुझे पीठ रखने
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