रचनाकार

“पतंग”

@मीनाक्षी गर्ग…

पतंग, मदमस्त हवा में लहराती, इठलाती, बलखाती, झूमती सबका मन मोह लेते हुए बस अपनी ही धुन में हवा की हर लहर के साथ कभी ऊपर जाती तो कभी नीचे आने लगती ऐसी ही तो थी राधिका ।

साँवली सूरत, केश घुटने छूते हुए, एक लट सदा मस्तक पर ।
जब भी कुछ सन्नाटा कक्षा में होता, तो कुछ न कुछ हलचल, कक्षा की सारी लडकियां हँसने लग जाती । खुद तो सजा में सबसे आगे बाकि सब उसके पीछे। जब भी अध्यापिका कारण पूछती कि क्यों हँस रही हो, बता ही न पाती, क्योंकि खुद ही नही पता कि क्यों बेवजह खिलखिला रही है । हर किसी के मुख पर राधिका , राधिका । जब भी कभी उसकी कोई सहेली उदास होती अपनी चुलबुली हरकतों से उसे हँसा देती ।

जैसे जादू की झप्पी दे दी हो। अब ये मुन्ना भाई को याद मत करने लग जाना । यहाँ तो बात चल रही है अपनी नटखट राधिका की।

हँसना है पर क्यों ? ये पता नही ।
शनिवार के दिन जब सब लडकियां अगले दिन रविवार है कहकर खुश होती, उसके चेहरे पर अजीब सी मायूसी होती ।

उसका मन करता कि काश कोई इतवार न होता । रोज उसे स्कूल आना पडे ।

कारण कोई कहता नही था परन्तु जानते सभी थे । राधिका की माँ तो बचपन मे ही चलबसी थी । पिता ने माँ के बाद एक बरस में ही शादी कर ली । शादी भी किस दिन ,जिस दिन उसने अपनी माँ खोयी थी । हर साल उस दिन वह गुमसुम ही रहती । पर माँ को वादा किया था कि उदास नही रहेगी , हमेशा चहकते रहेगी ।

अपनी माँ को किया वादा हमेशा पूरा करने की कोशिश में रहती । कभी कभी सोचती की माँ को ही तो खोया था , पिता का प्यार तो उनके होते हुए भी ही था । लडकी पैदा होना उसके लिए सजा क्यों ?

सौतेली माँ का व्यवहार इतना खराब कि उसका मन घर से भाग जाने को करता ।
बेटे की चाह तो उसके पिता को हमेशा से थी , इसलिए एक परिचित का बेटा उन्होने गोद ले लिया ।

बारहवीं के बाद अपनी सभी सहेलियों से अलग होने बाद वह बहुत उदास रहने लगी । ज्यादातर उसकी सभी सहेलियां पढ़ने के लिए किसी और शहर मे चली गयी थी ।

ससुराल में उसके सास – ससुर , पति रोहन और एक देवर रोहित। शुरू में उसे बहुत दिक्कतों का सामना करना पडा क्योंकि यहाँ सभी सीरियस मिजाज के थे । फिर बहु शब्द ही बहुत है ।

वह हमेशा मुरझाई मुरझाई रहने लगी। एम ए करते हुए ही उसके पिता ने उसकी शादी कर दी । फाइनल परीक्षा भी शादी के बाद ही हुई। साल में दो दिन के लिए भी अपने मायके जाना, तिहाड़ जेल की सजा काटने से भी बुरा लगता ।

जल्दी ही राधिका ने दो जुड़वा बेटियों को जन्म दिया । शुरू में सभी ने कहा काश एक बेटा भी हो जाता क्योकि वंश तो बेटे से ही चलता है । फिर धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा ।

राधिका को तो मानो जीवन का मकसद ही मिल गया । उसके बाद वह मायके कभी गयी ही नही, अपनी दोनो बेटियों में उसने अपना बचपन जीना शुरू किया ।
हर समय खिलखिलाती रहने से, घर के और सदस्य भी बदलने लगे । बेटियां स्वीमिंग सीखती तो राधिका भी वही सीखती , उनके साथ हर खेल, पढाई। उसे हर समय लगता जैसे उसे उसका बचपन मिल गया हो, अब झूठी हँसी न हँसकर, हर हँसी हरदम कारणों में होने लगी ।

देवर की शादी मे, सबसे पहले ” लो चली मै “,,,,,,,,हां जी ,,,,हां जी हम आपके हैं कौन के गाने पर जोरदार डांस ।

घर में हर समय हसी खुशी का माहौल। घर में नकारात्मक बात करने पर सख्त पाबंदी थी। जो भी उदासी भरी बातें करता । उसे सजा मिलती कि अगले दिन की बेड टी सबके लिए वही बनायेगा ।

अब आप ही बताइए सब सो रहे हो तो सबसे पहले उठने वाले को यह सजा ही लगेगी ।

एक दिन वह अपनी देवरानी मीरा के साथ छत पर टहल रही थी । अचानक एक रंगबिरंगी पतंग आकर छत पर गिरने लगी । राधिका ने उसे नीचे गिरने से पहले ही पकड लिया । तुरंत मनजा लाकर उसे उड़ाने लगी। मीरा ने कहा भाभी आपको कितनी अच्छी तरह पतंग उड़ाना आता है। राधिका ने मीरा की ओर मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि हम औरतों की जिन्दगी भी पतंग की तरह होती है, पहले मायके वाले डोर पकड़ते है, फिर ससुराल वाले ।

जीवन में उतार-चढाव जैसे कोई पतंग काट रहा हो । लेकिन डोर हमारी किसी हाथ में हो, अपने मनोबल को हमे खुद बढ़ाना है ।

कोई भी परेशानी आये बस यही याद रखना है कि गिरना नही है, निराश नही होना है । कुछ नही मिला, तो कुछ और तो मिला ही है । जीवन में कोई एक मकसद जरूर होना चाहिए। अगर सपने हमारे अधूरे रह गये हों, तो अपने बच्चों के सपने को पूरा कराना चाहिए ।

कोई भी परेशानी आये, माथे पर कोई शिकन नही होनी चाहिए। सबसे ऊंची लहराती पतंग सबको अच्छी लगती है । कटी पतंग तो अक्सर कूड़ेदान मे ही मिलती है ।

तभी उनकी सासू मां की आवाज आती है । एक हफ्ताह से सुबह की बेड टी वो ही बना रही थी, अब ये मत पूछना क्यों ?

सजा मे थी वो इसलिए।

शाम की चाय और गर्मागर्म नाश्ता तो बहुओं से ही चाहिए था ,,,,,,,, आखिर सास का रौब भी तो कुछ चीज है, बेड टी की बात अलग है ,,,, रूल इज फिर एवरी वन । हस मत पगली प्यार हो जाएगा!

21/01/2020

One thought on ““पतंग”

  • डाक्टर महिमा सिंह

    Bahut hi shshakt abhivyakti aapki aap ki ।
    .
    Her pahlu ko bilkul SATEEK SHABDO MAI पिरोया है आपने। बधाई हो ।👌👌🌹🙏🙏👍👍👍👍👍

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