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ट्रंप की फोटू और इटली का इजराइल को दो टूक जबाब

@ संजय दुबे ( वरिष्ठ पत्रकार )
अमरीका का राष्ट्रपति होना मतलब खुदा होना है ? ऐसा हम नहीं कह रहे हैं . ट्रंप ,खुद ही बता रहे है . अभी हाल ही में जनाब ने अपनी एक फोटू दुनिया को दिखाई . जिसमें वो ईसा मसीह बने हुए थे . इसमें ट्रम्प एक बीमार आदमी के सर पर हाथ रखें दिखें . इतना ही नहीं इनके हाथ से तस्वीर में जादुई किरण भी फूटती दिख रही थी . इसको देख कर लोग बाग़ मार आपस में जूझ पड़े . किसी का कहना है कि ऐसा नहीं करना चाहिए था ? ये ईसा मसीह का अपमान है . ये –वो ,ऐसा –वैसा . गज़ब किये पड़े हैं आप लोग ? अरे जब पोप ने ट्रंप को ईरान युद्ध के लिए कोसा तब किसी ने उनको कुछ नहीं कहा ? जब उसी के जवाब में ट्रंप ने फोटू लगा कर अपने सोशल साइट ‘ ट्रुथ सोशल ‘पर चेप दिया तब मार बवाल मच गया ? काहे भाई ! अमरीका के राष्ट्रपति है . टम्बकटू के थोड़े है कि जिसके मन में जो आएगा कह के निकल जाएगा . कालिदास के बाद ऊँगली दिखा के बतियाने वाला राष्ट्रपति दुनिया को ट्रंप के रूप में मिला है . किसी को कुछ भी कह सकते है ? अब चाहे वो फ़्रांस के राष्ट्रपति की लुगाई हो, जापान की प्रधानमन्त्री हो या फिर ईसाईयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप ही क्यों न हो ? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता . पोप ने ईरान में अमरीका –इजराइल युद्ध को लेकर एक बात कही थी . पोप ने बिना नाम लिए अपरोक्ष रूप से अमरीका को सर्वशक्तिमान होने का भ्रम बता दिया था . वैसे ,काफी हद तक ये बात सच भी है . ये बात ट्रंप को बुरी लग गई . जब इसकी भनक ट्रंप को लगी तो आदत के मुताबिक उनकी प्रतिक्रिया आई . ट्रंप ने कहा कि –“मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो ईरान के पास परमाणु हथियार होने को जायज़ मानता हो .” अब सवाल ये है कि पोप से ट्रंप को इतनी दिक्कत क्यों है ? दरअसल उनको लग रहा है कि दुनिया में जो भी ईरान युद्ध या ट्रंप की आलोचना कर रहा है वो वामपंथी है . वामपंथियों से ट्रंप का छत्तीस का आंकड़ा है .सर्वशक्तिमान वाले बयान के बाद ट्रंप ने जो एक तस्वीर शेयर की, देखने लायक और ट्रंप को समझने में काफी मदद करती है . हालांकि इसको बाद में उन्होंने हटा भी दिया .पर जब तक हटाया तब तक ये दुनिया भर में वायरल हो चुकी थी .इस तस्वीर में ट्रंप मियां बाइबिल शैली के कपड़े पहने दिख रहे है .बिस्तर पर एक बीमार आदमी हैं जिनके ऊपर ट्रंप हाथ रखे है .इनके हाथ से दिव्य रौशनी निकल रही है .जबकि वहीँ खड़े एक सैनिक ,बेसबाल टोपी पहने एक दाढ़ी वाला व्यक्ति ,एक नर्स और प्रार्थना करती महिला दिख रही हैं .जिनके देखने का भाव एक दम प्रशंसा भरा है . जबकि आकाश में चीलें ,एक अमरीकन झन्डा और धुंधली आकृति दिख रही है . ऐसा करने के पीछे सिर्फ एक ही कारण है वो है पोप को बताना कि आप बेशक ईसाईयों के सर्वोच्च धर्मगुरु हो सकते हो पर हम भी दुनिया के खुदा से कम नहीं है . ऐसा हुआ क्यों ? आइये ! इसको थोड़ा संक्षेप में जान लेते है . दरअसल बीती 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमरीका और ईरान के बीच बात हो रही थी . पोप ने उसी शाम को एक प्रार्थना सभा में कहा कि कुछ लोग है जो समझते है कि उनके पास बहुत ज्यादा सैन्य ताकत है और वो सबसे ऊपर है . इतना ही नहीं उनको लगता है कि वो जो युद्ध कर रहे है धार्मिक आधार पर भी सही है . अब आप समझ गये होंगे उनका इशारा किस तरफ था . पोप की इस बात से पहले ट्रंप ने ईरान की सभ्यता को मिटाने की बात कही थी .पोप ने वही कहा जो किसी धर्मगुरु को कहना चाहिए था . पोप ने कहा कि –“ ईश्वर ! युद्ध करने वालों की प्रार्थना नहीं सुनता ,बल्कि उन्हें अस्वीकार करता है .” इतने पर ही रूक जाते तब गनीमत थी . “यशायाह” जो कि बाइबल के पुराने नियम का एक प्रमुख हिस्सा है . जिसे यशायाह नाम के एक नबी ने 8वीं शती ईसा पूर्व लिखा था .इस किताब में भी ईसा मसीह के आने का जिक्र है . इसी किताब के एक अंश का हवाला देते हुए कहा कि –“चाहे तुम कितनी भी प्रार्थना करो ,मैं नहीं सुनूंगा –तुम्हारे हाथ खून से सने हैं .” ये बात पोप ने तब कही थी जब ट्रंप ने ईरान के सारे उर्जा केन्द्रों को नष्ट करने की बात कही थी . साथ ही ये भी कहा था कि –“आज की रात एक सभ्यता नष्ट हो जायेगी .” इस बात को जब ट्रंप ने सुना तो वहीँ किया जो उनसे उम्मीद थी . ट्रंप ने लिखा कि –“मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह सोचे कि अमरीका ने वेनजुएला पर भयानक हमला किया था ,एक ऐसा देश जो भारी मात्रा में ड्रग्स अमरीका भेज रहा था .” साथ ही ये भी कहा कि –“मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो अमरीका के राष्ट्रपति की आलोचना करें , क्योंकि मैं वही कर रहा हूँ जिसके लिए मुझे भारी बहुमत से चुना गया था .” अब आप इसे क्या कहेंगे ? अमरीका की विदेश नीति या ट्रंप का अमरीका को पीछे ले जाने वाला निर्णय ? या इजराइल के चढ़ाने पर ईरान को 50 साल पीछे कर देने का प्रयास ? जो भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि ट्रंप किसी चुने हुए राष्ट्रपति के बजाय एक तानाशाह सा रवैया दिखाते रहे है . चाहे वो कोई भी मसला हों . ट्रंप ने पोप लियो के लिए एक और भी अपमानजनक बात कही . ट्रंप के अनुसार अगर लियो अमरीकी नहीं होते तब उनको ये पद ही नहीं मिलता . इसके समर्थन में उनका बयान है कि –“अगर मैं मतलब ट्रंप व्हाइट हाउस में नहीं होते तब लियो वेटिकन में नहीं होते .” ट्रंप ने लियो के लिए ये भी कहा कि उनको अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए .सामान्य ज्ञान का उपयोग करना चाहिए . ट्रंप के सुर में सुर मिलाना चाहिए .कट्टर वामपंथियों को खुश करना बंद करना चाहिए . पोप को एक महान पोप बनने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए. राजनेता बनने पर नहीं . अब आप समझ रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या है कि ट्रंप इतना खुल कर पोप के खिलाफ बोल रहे है . क्या उनको अपनी पार्टी के लिए अगले चुनाव में वोट नहीं चाहिए ? जो इस तरह से कैथोलिक चर्च के पोप के खिलाफ उल्टा सीधा जो भी मन में आता है बकें जा रहे है. अमरीका के भीतर एक वोट सर्वे के अनुसार ट्रंप को 2024 के चुनाव में 55 % कैथोलिक मतदाताओं का वोट मिला है . लेकिन इसके बाद भी उनके रूढ़िवादी प्रोटेस्टेंट इन्जीलवादी नेताओं के साथ भी बेहतर सम्बन्ध है. और, इस धड़े ने ईरान युद्ध का समर्थन किया है . इसीलिए ट्रंप मियां पोप की आलोचना सार्वजनिक रूप से कर रहे है . इतना ही नहीं इनके रक्षा सचिव पीट हेग्सेथ ने अमरीकियों से “यीशु मसीह के नाम पर विजय प्रार्थना के लिए” भी आग्रह किया था . मजेदार बात ये है कि जब एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि -“क्या ईश्वर ईरान युद्ध को मंजूरी देते है ? तो उनका जवाब था ,-“हाँ ! क्योंकि ईश्वर अच्छा है और ईश्वर लोगों की देखभाल करना चाहता है .” अब आप खुदे बूझ जाइए कि क्या ये अमरीकी राष्ट्रपति के शब्द है ,या किसी तानाशाह के . ये भाषा किसी भी उस आदमी को कत्तई नहीं सुहाएगी जिसे स्वतंत्रता ,समता , अपनी बात को खुल के कहने का सलीका पता होगा . हाँ ! उन लोगों को जरूर पसंद आएगी जो हमेशा से किसी ऐसे ही सनकी लोगों के यहाँ दरबार लगाये हों और उनकी जी हुजूरी में ही अपनी शान समझते रहे हो . ऐसा नहीं है कि पोप कोई छोटी मोटी हस्ती है . वो भी एक देश के मालिक है . भले ही वो छोटा है . पोप को जब ट्रंप और उनके प्रशासन का इस तरह का बयान पता चला तब उन्होंने भी एक चिठ्ठी के जरिये दुनिया को अपने विचारों से रूबरू कराया . उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि लोकतंत्र तभी स्वस्थ रहते है जब नैतिक मूल्यों पर वो आधारित होते है. शासन ,प्रशासन उन्हीं नैतिक मूल्यों के लिए और उनके ही साथ संचालित होता है . यदि इसका अभाव रहता है तब ये बहुसंख्यक तानाशाही बन सकता है या आर्थिक और तकनीकी अभिजात वर्ग के प्रभाव वाला मुखौटा .यह बात पोप की दुनिया के सामने तब आई है जब पोप 4 अफ्रीकी देशों के दौरों पर हैं . इस बयान को आप देखिए इसमें किसी भी का नाम नहीं लिया गया है . पोप ने ट्रंप को भयानक भी बताया है . सबसे महत्वपूर्ण बात उनकी ये रही है कि लोकतंत्र को लेकर उनके विचार आज दुनिया के लिए काफी मायने रखते है . पोप ने लोकतंत्र के नेताओं से सत्ता के किसी भी दुरूपयोग से बचने की बात कही है , पोप कह रहे है कि –“संयम वैध अधिकारों के प्रयोग के लिए आवश्यक सिद्ध होता है. क्योंकि, सच्चा संयम आत्म प्रशंसा को रोकता है और सत्ता के बेंजा इस्तेमाल को रोकता है .”अब आप समझ ही गए होंगे कि उनका इशारा ट्रंप के किस रूख की तरफ हैं ,इतना खुल कर आज तक कोई ट्रंप के खिलाफ नहीं बोला जितना पोप ने कहा है . साफ़ –साफ़ कह रहे है कि ट्रंप लोकतंत्र के नाम पर एक तानशाही चला रहे है .जिसके लिए वो अपनी उस जीत की दुहाई दे रहे है जिसको पाने के लिए उन्होंने युद्ध को टालने की बात पर जोर दिया था न कि बेवजह युद्ध शुरू करने के लिए .
इस युद्ध से दुनिया किस तरह से संकट में फंसी हुई है इसका भान अमरीका को खूब है, फिर भी वो अपनी बादशाहत साबित करने के चक्कर में अभी भी इसकी आशंका को खत्म नहीं कर रहा है .
युद्ध से दुनिया को उबरने में अभी काफी वक्त लग सकता है . एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया को ईंधन और गैस की कमी से अभी और जूझना होगा .इसके आने वाले समय में फिर से पुराने वाले समय में जाने में वक्त लग सकता है . जिस तरह से ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी और मिसाइल हमले हुए है उन्हें इतनी जल्दी ठीक नहीं किया जा सकता . एक अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र से तेल लेकर निकले टैंकरों को अपने एशियाई देशों में पहुँचने में लगभग डेढ़ महीने लग जाता है . इस लिहाज से अभी जो भी टैंकर पहुँच रहे है वो युद्ध के शुरूआती समय के लदे हुए जहाज हैं. आज जब हम बात युद्ध के पहले वाली स्थिति की कर रहे है तब उसका मतलब साफ़ है कि तेल जब जितना चाहिए था फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र से मिल जाता था . आज ऐसा नहीं है . एक तो दाम भी पहले वाले नहीं है दूसरे आज जितना तेल का उत्पादन चाहिए उतना नहीं है . अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल के अनुसार अप्रैल की स्थिति मार्च से भी ख़राब होगी . इनके अनुसार सबसे राहत भरे अनुमानों के मुताबिक भी नुकसान दोगुना हो जाएगा .इसकी वजह से महंगाई बढ़ेगी .और आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा . अभी होर्मुज़ के कारण सिर्फ तेल का ही संकट नहीं,अनाज उत्पादन पर भी असर होगा . अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की मानें तब आने वाले वक्त में कई देशों के भीतर तेल को लेकर राशनिंग शुरू हो सकती है . एक अनुमान के अनुसार यदि होर्मुज़ को आज से खोल भी दिया जाय तब तेल की उपलब्धता भले बढ़ जाय पर युद्ध से पहले वाले रेट पर तेल मिलना अभी सम्भव नहीं है . एक्सपर्ट की मानें तब तेल संकट का नया दौर शुरू इस महीने से शुरू हो सकता है . हालात अगर ठीक रहें तब भी एक से डेढ़ महीने तक ये शार्टेज बनी रह सकती है . उधर अमरीकी ऊर्जा विभाग कह रहा है कि तेल की ये कमी अभी कई महीनों से लगाये इस साल के अंत तक खिंच सकती है . एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी देशों ने अपने रिजर्व भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है . ईरान युद्ध के कारण इस मंडी से रोजाना 10 से 12 करोड़ तेल बाज़ार नहीं पहुँच पाया है . इसकी भरपाई के लिए रोज़ 3 से 4 करोड़ बैरल तेल रिजर्व से निकाले जा रहे है . ऐसा आने वाले 3-4 महीनों तक किया जा सकता है लेकिन फिर से इन रिजर्व भंडारों को भरना होगा . ये कमी का सिलसिला यूक्रेन रूस युद्ध से शुरू हुआ है .अमरीका के भीतर जब कुछ तेल रिजर्व को निकाला गया ,तब जो बाइडन को इसके लिए दोषी ठहराया गया था . इसकी बातें ट्रंप ने भी अपने चुनाव में खूब की थी . इतना ही नहीं ट्रंप ने सत्ता में आते ही इन भंडारों को फिर से भरने का वादा भी किया था . पर आज तक वो अमरीकी तेल रिजर्व अभी भी खाली बताये जा रहे है . जब इस तरह के हालात हो तब हर देश अपने रिजर्व भंडार को आपात कालीन स्थिति के लिए फिर से भरेगा ही भरेगा .इसके लिए भले उसे महंगे दाम पर तेल ख़रीदना पड़े . तेल उत्पादन की जहाँ तक बात है उसे सऊदी अरब ,यूएई ,क़तर और अन्य देश अब बढ़ाने से पहले उसके सुरक्षा उपाय पर जोर देंगे . इसलिए भी ऐसी आशंका है कि उत्पादन को अपने पुराने स्तर तक आने में वक्त लग सकता है . तेल का संकट तो अपनी जगह है लेकिन गैस संकट के बादल इतनी जल्दी छंटते नहीं दिख रहे .जबकि तेल से ज्यादा जरूरत इसकी है . दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी आपूर्ति का काम फिलहाल क़तर के रास लाफ़ान से होता है . पूरी दुनिया की 21% एलएनजी इसी प्लांट से आती है और इसको काफी नुकसान हुआ बताया जा रहा है . ईरानी मिसाइल हमलों में इस प्लांट की 17% क्षमता को तबाह कर दिया गया है . जिसे दुबारा अपने पुराने फॉर्म में आने में वक्त लगेगा . क़तर के अधिकारियों के अनुसार इनकी मरम्मत में महीनों नहीं कई साल तक का वक्त लगेगा .जो 3 से लेकर 5 साल तक का हो सकता है . दुनिया की आगे आने वाली मांग को देखते हुए खाड़ी के तेल और गैस उत्पादक देश अपने हिसाब से तैयारी कर रहे थे .क्योंकि इसके लिए उनको अरबों डालर का निवेश करना था जिससे वो मार्केट में बने रहे . अब इस युद्ध के चलते उनको अपनी इस रकम को उत्पादन बढ़ाने की जगह मरम्मत और अपने सुरक्षा के इंतजाम में खर्च करना पड़ेगा .जिससे दुनिया को उसकी मांग के अनुरूप गैस की आपूर्ति खाड़ी देशों के इतर देशों से खोजनी होगी .जिसका खर्चा एशिया देशों के लिए जाहिर है महंगा होगा . एक बार तेल के लिए तो सोचा भी जा सकता है कि हालात थोड़े मुश्किल होंगे लेकिन गैस के मामले में इसको इससे ख़राब वाली श्रेणी में ही रखना पड़ेगा . क्योंकि क़तर के लिए होर्मुज के अलावा और कोई समुद्री मार्ग नहीं है. ऐसे में तेल की आपूर्ति तो जमीनी पाइप लाइन से सम्भव हो सकती है पर गैस को कैसे करेंगे ? ये एक बड़ा सवाल है ? भारत के लिए तो और भी ज्यादा ये चिंताजनक बात है .क्योंकि इसके चलते लम्बे समय तक गैस भारत को दूसरे देश से मंगानी होंगी और उसका खर्चा भी ज्यादा आएगा .ऐसे में देश के भीतर महंगाई बढ़ने के चांस ज्यादा होंगे . मौजूदा समय में क़तर ने अपने नये उत्पादन विस्तार को रोक दिया है . इन सारे हालात को देखते हुए तो यही लग रहा है कि दुनिया में आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ेगी . अभी चल रहे ईरान अमरीका –इजराइल युद्ध विराम के कभी भी शुरू होने का खतरा दुनिया के सामने मंडरा ही रहा है कि इटली ने इजराइल के साथ अपने सैन्य सहयोग और रक्षा समझौते को रोक देने का ऐलान कर दिया है . बीबीसी इसकी खबर देते हुए अपने वेबसाइट पर लिखता है कि वेरोना में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए इटली की पीएम जार्जिया मेलोनी ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार ने इजराइल के साथ रक्षा समझौते के रिन्युअल को निलम्बित करने का फैसला किया है . ये एक ऐसा समझौता है जिसे कोई भी सरकार हो 5 साल के लिए इसको बढ़ाती चली आ रही थी . इसका ईरान युद्ध से कोई लेना देना नहीं है . जार्जिया मेलोनी जो कि खुद ही एक दक्षिणपंथी है. इजराइल को लेकर उनका इस तरह का व्यवहार काफी हैरान करता दिख रहा है. इससे पूरी दुनिया में एक नये बहस की शुरुआत हो गई है कि आखिर ऐसे वक्त में कैसे इटली इजराइल से ये समझौता आगे जारी नहीं रखने की बात कर रहा है ? माना जा रहा है कि इसके पीछे लेबनान में हुई एक झड़प है .जिस पर इटली ने नाराजगी दिखाई है . इस समय लेबनान के भीतर इजराइल के हमले जारी है .इसको लेकर वहां सयुंक्त राष्ट्र संघ की सेना भी तैनात है . ऐसी ही एक इतालवी सैन्य टुकड़ी पर इजराइली जवानों ने चेतावनी के तौर पर उनके ऊपर गोलीबारी कर दी थी . जिसमें एक वाहन को नुकसान भी पहुंचा था . इसी की शिकायत के लिए रोम में इजराइली राजदूत को इटली ने तलब कर दिया था . अभी ये सब हुआ ही था कि इटली के विदेशमंत्री एंटोनियो तजानी ने लेबनान में नागरिकों पर अस्वीकार्य इजराइली हमलों की निंदा कर दी . इटली के विदेश मंत्री ने कहा कि लेबनान के भीतर आम नागरिकों हमले तुरन्त बंद होने चाहिए और ये अस्वीकार्य है . गज़ा जैसी और एक स्थिति से हर हाल में बचना चाहिए . इसे जैसे ही इजराइल ने सुना उसने भी फ़ौरन इटली के राजदूत को तलब कर दिया . हाल के दिनों ने इटली के भीतर विपक्षी दलों के चलते मेलोनी सरकार पर इजराइली हमले और फिलिस्तीन को लेकर दवाब बढ़ा है . रोम में लाखों की तादाद में लोगों ने इसे लेकर प्रदर्शन किया है .इसे भी मेलोनी के इस समझौते को रिन्युअल न करने के पीछे की वजह माना जा रहा है . स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार इटली आज की तारीख में इजराइल को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा बड़ा देश है . हालाँकि ये महज कुल हथियारों का 1.3% ही है . लेकिन इटली का नाम लिस्ट में तो है ही . दूसरे नंबर पर जर्मनी है और पहला नंबर किसका होगा ? ये तो आप भी जानिये गए होंगे . अगर अब भी नहीं बूझ पाए है तो बता दे रहे है वो है बड़े मियां , अरे वहीँ ! ट्रंप मियां. छोटे मियां को जानते है कि नहीं ? जहाँ बड़े, वहां छोटे . छोटे मियां मतलब ,नेतन्याहू . और कौन हो सकता है ? है न ! वैसे इन्हीं बड़े मियां और छोटे मियां ने पूरी दुनिया को फेटमफेट कर रखा है . फ़िलहाल अब सभी देशों को यूनाइटेड नेशन का एक आपातकालीन सत्र बुलाना चाहिए जहाँ इन सारी मुद्दों पर बात हो सकें कि कैसे, एक दो देश पूरे दुनिया को बर्बादी की तरफ ले जा रहे है .

 

ट्रम्प की फोटो है फिलहाल उनके ट्रुथ सोशल अकाउंट से हट गई है.

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