रचनाकार

कैसी माँ हो?

@ वर्षा गलपांडे, नागपुर,महाराष्ट्र…

सर्वप्रथम अपने मात-तात को पूजूं,
पश्चात् ही जग में दूजा काम करूं।

सौम्या एक गृहणी है, जिसके पति यानी सोहम रेलवे में लोको-पायलेट की पोस्ट में है। जिनकी पोस्टिंग चंद्रपुर, महाराष्ट्र में है और इनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं यानी हम दो हमारे दो ये कहावत इन पर बिल्कुल ठीक बैठती है। तृप्त चार साल का है और रावी ढेड़ साल की है।दोनों ही बच्चे दिखने में इतने मासूम व प्यारे हैं कि जब भी बाहर जाते हैं तो आने जाने वाले लोग उन दोनों को मुड़ कर ना देख ले और रावी के गोदलूँ गालों को गुगली-गुगली बुश ना कर ले, तब-तक मन ही न भरे। मग़र ये दोनों जितने प्यारे हैं उतने ही शैतान भी हैं। फिर भी एक छोटा सा सुखी परिवार है इनका। सोहम को अक्सर काम की वजह से दो-दो दिन बाहर रहना पड़ता है। जिसकी वजह से सौम्या को काम के साथ-साथ दोनों बच्चों को भी अकेले ही संभालना पड़ता था।

कई बार सौम्या को दोनों बच्चों को लेकर जरूरी सामान खरीदने बाजार भी जाना पड़ जाता था। ऐसे ही एक दिन रावी का डाइपर और कुछ मेडिसिन खत्म हो गई थी तो उसने जल्दी-जल्दी घर के काम निपटाए और दोनों बच्चों को लेकर मार्केट के लिए निकल गई। उसने बस में चढ़ कर बैठने के लिए सीट देखी तो उसे कहीं भी खाली सीट नहीं दिखी तो वो थोड़ा अंदर खिसक कर दोनों बच्चों को लेकर खड़ी हो गई। रावी गोद में थी और तृप्त ने सौम्या का हाथ पकड़ राखा था ।रावी ने अचानक बगल में खड़ी एक आंटी के बालों पर अपने नन्हे-नन्हे हाथों के पंजों से वार किया वो आंटी अपने साथ खड़े रिश्तेदार से बात करने में मग्न थी।

अचानक हुए इस हमले से वो दर्द से चीख पड़ी और रावी को घूर कर देखा और सौम्या को बोली ‘कैसी माँ हो?’ बच्चे को नहीं संभाल सकती। मेरे पूरे बाल खराब हो गए। सौम्या ने जल्दी से उस महिला से माफी मांगी।

वहीं थोड़ी देर बाद एक सीट खाली हुई और उसे बैठने को जगह मिल गई। बगल में एक बीस साल की लड़की बैठी हुई थी जो अपने फोन में किसी लड़के से वीडियो कॉल में बात करने में व्यस्त थी और बीच-बीच में जब नेटवर्क चला जाता और फ़ोन कट हो जाता तो वो दोनों होंठों का पाउट बनाकर तो कभी विनिग स्टाइल में उंगलियों को कर सेल्फी भी ले लिया करती फिर थोड़ा फ़िल्टर मार कर उसे पोस्ट कर देती। वहीं मूंगफली वाला सौम्या की सीट के पास आकर मूंगफली ले लो, गरमा-गर्म मसाले दर मूंगफली ले लो चिल्लाने लगा। ये देखकर तृप्त की आंखें चमक गई और मुंह में पानी आ गया और वह मूंगफली खाने की जिद करने लगा तो सौम्या ने एक मूंगफली का कोन खरीद लिया और जैसे ही मूंगफली वाले से तृप्त ने कोन लेने के लिए हाथ बढ़ाया वैसे ही एक स्टॉप पर बस अचानक से रुकी और बस का ब्रेक लगते ही बैलेंस बिगड़ा और तृप्त बगल में बैठी लड़की से टकरा गया जिसकी वजह से उस लड़की का फ़ोन नीचे पैरों के पास गिर गया।

लड़की ने तृप्त को गुस्से से देखा क्यों कि वो छोटा था तो उस पर गुस्सा न करके वो सौम्या को बोली ‘आंटी कैसी माँ हो? आप अपने बच्चों को संभाल नहीं सकती हो तो घर पर ही रहना चाहिए ना, मेरा इतना महंगा फ़ोन गिरा दिया।
सौम्या ने उसे भी नजरें नीचे कर धीमी आवाज में सॉरी बोल दिया।सौम्या ने तृप्त को अपने पास खींचा और बैठा लिया।

अगला स्टॉप आते ही सौम्या बस से उतर गई और मेडिकल शॉप से जरूरी सामान लिया। बच्चों के लिए कुछ कपड़े और सब्जियां लेकर इस बार बस से न आकर प्राइवेट ऑटो से घर आ गई। वो घर आकर दोनों बच्चों को खाना खिलाकर सुलाने के लिए बेडरूम में आ गई। जब सौम्या रावी को सुलाने के लिए सिर को थप-थपा रही थी उसके दिमाग में लोगों की बातें ही चल रही थी ‘कैसी माँ हो?’ ऐसा नहीं है कि वो ये बातें पहली बार सुन रही थी। कई बार ये बातें उसने अपने करीबियों और रिश्तेदारों से भी सुनी थी।मगर उसे ये समझ नहीं आता था कि बच्चें हैं तो बदमाशियां तो करेंगे ही और वो तो नादानी में वो सब शैतानियां करते हैं ।

बच्चे छोटे हो या बड़े जब भी उनसे कोई गलतियां हो जाती है तो उनकी गलतियों के लिए माता-पिता पर और उनकी परवरिश पर क्यों उंगलियां उठाई जाती है? कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को कभी-भी गलत राह पर चलने की सीख नहीं देते हैं। वो समय और हालात ऐसे हो जाते हैं कि बच्चे गलतियां कर बैठते हैं मगर पड़ोसी-रिश्तेदार और बाकी लोग माता-पिता की परवरिश, रहन-सहन, घर के माहौल पर प्रश्नचिन्ह उठाने लग जाते हैं? मगर बच्चों की गलतियों पर हमेशा माता-पिता को दोषी क्यों ठहराया जाता है? यहां तक कि माता-पिता भी बच्चों की गलतियां देख कर खुद ही कह बैठते हैं कि जरूर हमारी ही परवरिश में कोई कमी रह गई होगी? जो माता-पिता ऐसा सोचते है तो क्या उनको ऐसा सोचना चाहिए? क्या उनको खुद के संस्कारों पर विश्वास नहीं है?

समय एक-सा नहीं होता और सब को इन परिस्थितियों से होकर गुजरना ही होता है। इसलिए किसी पर भी प्रश्न करने से पहले अपने घर में भी एक नजर घुमा लेना चाहिए। कहते है कि देश और समाज में बदलाव लाना है तो उसकी शुरुआत खुद से करो बाकी सब अपने आप ही ठीक हो जायेगा। सौम्या ने सोचा वो हर किसी को ये सब तो नहीं समझा सकती मगर खुद से ये शुरुआत जरूर कर सकती है। इसलिए उसने सोचा कभी-भी ये प्रश्न कैसी माँ है /कैसे माता-पिता है? किसी और को नहीं कहूंगी और अपने बच्चों को भी यही शिक्षा दूँगी और बाहर वालों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए अपने बच्चों को कभी भी किसी प्रकार का दबाव नहीं डालूंगी। साथ ही किसी और के बच्चों से उनकी तुलना या उदाहरण पेश नहीं करूंगी। यही सब सोचते-सोचते सौम्या की भी कब आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला।

#Varsha_Galpande_Nagpur_Maharashtra @Varsha_Galpande_Nagpur_Maharashtra

One thought on “कैसी माँ हो?

  • Meenakshi Garg

    Very nice post

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