रचनाकार

बिना रीढ़ का आदमी

शब्द मसीहा केदारनाथ…

आज बाबू जी बहुत खुशी-खुशी घर लौटे थे। चेहरे पर दिनभर काम करने की थकान भी रोज की तरह नहीं थी।

“प्रिया कहाँ है?”बाबूजी ने पूछा।

“अपने कमरे में है, कुछ देर पहले ही लौटी है एक धारणा प्रदर्शन कवर कर के , शायद एडिटिंग कर रही होगी अपने कमरे में।” माँ ने बताया और साथ पानी का गिलास भी दिया।

“इस लड़की को कितना समझाया है कि ये पत्रकारिता लड़कियों का काम नहीं है, इकलौती है सो थोड़ी छूट दे दी । आजकल क्या माहौल चल रहा है ये जानते हुए भी इसे अक्ल नहीं आती।” बाबू जी बोले।

“अक्ल कहाँ से आएगी ….खानदान पर जो गई है …हा हा हा । स्वतन्त्रता सेनानी दादा की पोती है , देशभक्ति का कुछ जज्बा तो उसमें रहेगा ही । शादी हो जाय तो सब समझ जाएगी जब घर की जिम्मेदारियाँ कंधों पर आएँगी।” माँ ने कहा।

“अच्छा …ये फोटो देखो जरा , कैसा लगता है ? अपनी प्रिया के लिए ठीक रहेगा ? वैसे अच्छा कमा लेता है और सबसे बड़ी बात ये है कि टी वी में रिपोर्टर है। जाओ उसे भी दिखा दो।” बाबू जी कपड़े उतारते हुए कहा । माँ फोटो को हाथ में लिए बेटी के कमरे में पहुंची।

बेटी कानों पर हेडफोन चढ़ाये कंप्यूटर पर अपनी ही धुन में लगी हुई थी।

“प्रिया बेटा ! तेरे बाबूजी आ गए हैं । जरा अपना काम तो रोक।” माँ ने उसके कंधे पर हाथ फिरते हुए अपनी उपस्थिती का अहसास कराया।

“हाँ, माँ! मुझे पता है बाबू जी आ गए । सी सी टी वी में देख लिया था । आज तो मूड अच्छा है , कुछ बढ़िया सा बना दो …तो उनका मूड और अच्छा हो जाएगा।” प्रिया ने कहा ।

“ये देख , तेरे बाबूजी एक फोटो लाये हैं । तू हाँ कह दे और उनका ही नहीं मेरा भी मूड अच्छा कर दे।” माँ ने फोटो हाथ में रखते हुए कहा।

प्रिया ने फोटो को एक नज़र देखा और पूछा- “ये करता क्या है ?”

“अरे! तेरी तो किस्मत अच्छी है, लड़का टी वी रिपोर्टर है। अच्छा कमाता है, तेरे बाबूजी बता रहे थे। अब बाकी बात तू ही कर ले।” माँ ने कहा।

“हम्म …तो जनाब टी वी चैनल में काम करते हैं। सॉरी माँ , आज भी आपका मूड खराब ही होगा। एक टाइम खा सकती हूँ, पर ईमान बेचने वाले से मेरी नहीं पटेगी । एक बिना रीढ़ के आदमी से ये देशभक्त खानदान की पोती शादी नहीं करेगी ।”

और प्रिया फिर से अपने काम में जुट गई।

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