रचनाकार

रचनाकार

कभी सोचा है जीवन में, एक दो साल ऐसा भी आएगा, साल दो साल में ही दुनिया का नजारा बदल जायेगा

कोरोना अपने डर से दुनिया में बहुत कुछ बंद करायेगा,चाहे बस, ट्रेन हो या जहाज़ अपनी मरजी से चलायेगा।उसकी मर्जी

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रचनाकार

छोड़ो जाति, धरम की दुनिया,
जोड़ो सबको एक हो जायें,
रहने लायक परिवेश बनाकर
आओ मिलकर फिर देश बनाये

मेरी कविता“रहने लायक देश बनाये- ✍️ Manoj Manav छोड़ो जाति, धरम की दुनिया,जोड़ो सबको एक हो जायें,रहने लायक परिवेश बनाकरआओ

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