रचनाकार

कभी सोचा है जीवन में, एक दो साल ऐसा भी आएगा, साल दो साल में ही दुनिया का नजारा बदल जायेगा

कोरोना अपने डर से दुनिया में बहुत कुछ बंद करायेगा,
चाहे बस, ट्रेन हो या जहाज़ अपनी मरजी से चलायेगा।
उसकी मर्जी के बिना कोई कही पर जा नहीं पायेगा,
अपने ही घर में अपनो से एकांतवास करायेगा।
कभी सोचा है कि एक दिन बीमारी ऐसा आयेगा,
सारी दुनिया ही जिसके नाम से कांप जायेगा।

चार दिन की ज़िन्दगानी को सार्थक कर जाता हैं,
जिसके पास गया उसके शरीर में पूरा रम जाता हैं।
पहुंच गया घर में एक बार तो सबको तड़पाता हैं,
आगे क्या होगा उसका कोई समझ नहीं पाता हैं।
कभी सोचा नहीं होगा दो गज कफन के बदले,
प्लास्टिक थैली पेकिंग में अपनो का शव आयेगा।

पहले बी पोजीटिव सुनकर, बहुत अच्छा लगता था,
अब पोजीटिव का नाम सुनकर, डर लगने लगा है।
कोई हो गया पोजीटिव, वो सब से दूर हो जाता हैं,
जीवन मरण के बिच में अब वो झूला खाता हैं।
कभी सोचा नहीं होगा चार कंधो के बदले मे,
सीधा एम्बुलेंस में ही बोड़ी श्मशान जायेंगा।

नहीं पहचान थी जिसकी कोई आज नाम भारी हैं,
उसे समाप्त करने की दुनिया ने की तैयारी हैं।
बना दी वेक्सीन का डोज कोरोना तुझे मिटायेगा,
मगर तब तक तु कितनो की जान लेकर जायेगा।
कभी सोचा नहीं होगा ऐसा अंतिम संस्कार भी होगा,
बिना किसी क्रिया कर्म के बोड़ी भट्टी में डाला जायेगा।

अलविदा, अलविदा,चला जा जहां से आया हैं,
हम खो चुके सब कुछ जो जीवन भर कमाया है।
ले ली लाखों की तूने जान, तेरा पेट भर गया होगा,
बक्ष दे हमको हमारे हाल पर जो भी होना वो होगा।
कभी सोचा है जीवन में एक दो साल ऐसा भी आयेगा,
साल दो साल में ही दुनिया का नजारा बदल जायेगा।
अलविदा अलविदा 2021अलविदा।
स्वागतम नया साल 2022 खुशियां लेकर आयेगा।
जो भी होगा नसीब में अब दे जाएगा।

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