रचना : गुलामी से आजादी
अशोक कुमार यादव मुंगेली… गरीबी, दरिद्रता और बेबसी जन मन का प्रतीक, समर्पण, चाटुकारिता, दासता, हैं उनके साथी। सलाहकार बन
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अशोक कुमार यादव मुंगेली… गरीबी, दरिद्रता और बेबसी जन मन का प्रतीक, समर्पण, चाटुकारिता, दासता, हैं उनके साथी। सलाहकार बन
Read Moreबृजेश गिरि, मऊ… जब तक निष्काम नहीं होता तब तक कोई राम नहीं होता। अयोध्या की बात निराली है, ऐसे
Read Moreरश्मि ‘लहर’… उनका मौसम नयनों में बदलता सपनों के चीत्कार से सहम जाता उनकी कल्पित मेंहदी का गाढ़ा-सुर्ख रंग जब-तब
Read Moreशब्द मसीहा केदारनाथ… “अरे! अभी तो ऑफिस से आए हो, और अभी कहाँ चल दिये ?” पत्नी ने हैरानी से
Read Moreसफरनामा—ए—ज़िंदगी… शालिनी राय अब वाचाल हुईं आंखें अधर है मौन प्रिये, किसने कितने गुनाह किए कौन गिने? इस कालचक्र के
Read Moreबाल श्रम निषेध दिवस की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं हंसता-खेलता मुस्कराता हर बचपन प्यारा-दुलारा चाहिए हर आंख को अपने सपनों का
Read Moreमेरी कलम से… आनन्द कुमार अरे रुको, कौन होते हो तुम, अयोध्या के बारे में कुछ कहने वाले, तुम सुनो
Read Moreतुम ही बतलाओ तुम ही समझाओ, आ रहा नया कौन चौकीदार जनता जी! मेरी कलम से… आनन्द कुमार कौन जीत
Read More@शब्द मसीहा केदारनाथ… “सुनिए जी , इतना परेशान क्यों हैं ? ऐसा क्या हो गया जो ये दादा जी की
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