पर मैं विधवा हो जाऊँगी
@शब्द मसीहा केदारनाथ…
“सुनिए जी , इतना परेशान क्यों हैं ? ऐसा क्या हो गया जो ये दादा जी की पुरानी-पुरानी किताबें पढ़ रहे हैं ।” पंडिताइन चाय का कप रखते हुए बोली।
“अब क्या बताऊँ, तुम्हें भरोसा नहीं होगा । मुझे तीन जगह से फोन आए हैं।” ज्योतिषी पंडित जी बोले।
“हा हा हा …. तब तो लक्ष्मी आने वाली है, इसमें डरने और परेशान होने की क्या जरूरत है ?” पत्नी ने कहा ।
“पता नहीं लक्ष्मी आने बाद ….रहने वाली है या सब कुछ ले जाने वाली है । कुछ समझ नहीं आ रहा है ….इधर कुआ और उधर खाई है।”
“अरे कुछ नहीं होगा । दुर्दिन तो पड़ोस वाले चमन चोपड़ा के आ गए , लगता है आपके लिए अब शुभ होगा , डरिए मत ।”
“पर चमन चोपड़ा के साथ क्या हुआ ?”
“होना क्या था , चमचागीरी की सजा मिली है औलाद को । बहुत झूठे नेताओं की भक्ति करता था , लड़की वालों ने झूठों का खानदान कहकर रिश्ता तोड़ दिया ।” पत्नी हँसते हुए बोली ।
“हे प्रभु जगननाथो हरि….. लोग इतने समझदार हो गए हैं ।”
“पर तुम इतना घबराए हुए क्यों हो?” पत्नी ने पूछा।
“मुझे झूठी और उनकी जीत की भविष्यवाणी करने को कहा गया है….नहीं तो सब माया का हिसाब देना होगा, जेल और बदनामी के साथ धंधा भी चौपट, या हो सकता है तुम विधवा बना दी जाओ …. तीनों संस्थाओं के नाम रोज अखबार में आते हैं । मैं झूठ बोलने के लिए …. ये पोथी और पंचांग देख रहा हूँ …सहारा ढूंढ रहा हूँ ग्रहों , नक्षत्रों का ।” पंडित जी बोले ।
“समझ गई , सब समझ में आ गया । पक्का वहाँ से फोन आया होगा ।” पत्नी ने गंभीर होते हुए कहा ।
“अब क्या करूँ ?”
“समेटो सब और दामाद जी को भी साथ ले चलो । इज्जत ,ईमान बचाना यहाँ संभव नहीं है। अगर सच साथ है तो विदेश में भी भूखे नहीं मरेंगे …पर सच छोड़ दिया और उनकी जीत की झूठी भविष्यवाणी की तो तुम भले ज़िन्दा रहो ….पर मैं विधवा हो जाऊँगी ।” और वह माथा पकड़कर बैठ गई ।



