रचनाकार

हंसता-खेलता मुस्कराता हर बचपन प्यारा-दुलारा चाहिए

बाल श्रम निषेध दिवस की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं

हंसता-खेलता मुस्कराता हर बचपन प्यारा-दुलारा चाहिए

हर आंख को अपने सपनों का चहकता सबेरा चाहिए,
प्यार मुहब्बत की खुशबुओं से महकता बसेरा चाहिए।
नफ़रतों से मीलों दूर जीवन का हर रंग सुनहरा चाहिए,
समंदरो के सफर में कश्तियों को उनका किनारा चाहिए।
हर आंगन को अपना चमकता चांद और सितारा चाहिये
मज़हब के नाम पर अब नहीं, हमें कोई बंटवारा चाहिए।
अमन चैन से लबालब लबरेज हमारा भाईचारा चाहिए।
जमीं से आसमां तक खूबसूरत गुलाबी नज़ारा चाहिए।।
धन्य धान्य हर तरह के व्यंजन से भरपूर भंडारा चाहिए
अपने पैरों पर खड़ा हो हर शख्स न कोई बेसहारा चाहिए।
मुल्क में न कोई गरीब, न लाचार न कोई बेचारा चाहिए।
हंसता-खेलता मुस्कराता हर बचपन प्यारा-दुलारा चाहिए।
त्याग और बलिदान के भाव से भरा मुल्क हमारा चाहिए।
शिष्टाचार से अभिसिंचित चरित्र हमारा-तुम्हारा चाहिए ।
सभ्य समाज में न कोई बदचलन न कोई आवारा चाहिए।
समता और ममता की गंगा बहाने वाला बंजारा चाहिए ।
दिया करूणा का जलाने वाला गौतम हमें दुबारा चाहिए।
अपनी धरती का हर मंजर सुंदर, सुहाना, न्यारा चाहिए ।

स्वरचित
मनोज कुमार सिंह
लेखक/साहित्यकार/उप-सम्पादक कर्मश्री मासिक पत्रिका

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