रचनाकार

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हमीं ने,नफ़रतों के दाँव सब,उस को सिखाए थे वो हम पे चलता, उल्टा दाँव, तो,अफ़सोस अब कैसा

@ डॉक्टर वसीमुद्दीन जमाली हमीं ने गाँव में, शहरों के सपने ला के बेचे थेनहीं, पहले सा अपना गाँव, तो,

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