शब्द मसीहा : पैनिक फैलाना है
“अरे!भैया अखबार देख रहे हो ?”
“हाँ, क्या हो गया ? रोज ही तो अखबार आता है , प्रचार से भरा हुआ , हत्या, लूटपाट और नफ़रत से भरा हुआ ।”
“अरे! वो नहीं, इसमें लिखा है कि हमारा देश कोरोना की तीसरी स्टेज में पहुँच गया है ।”
“तो हैरानी और अजूबा किस बात का, हमने गुंडे, तिहाड़ी, हत्यारे, अनपढ़ और बाहुबली चुने थे। अब ऐसे लोगों से देश के विकास की उम्मीद तो स्टेज के रूप में ही की जा सकती है । और तू जरा दूर से बात कर । मास्क को नाक के ऊपर कवर कर। इन अखबारों को कुछ करना तो है नहीं पैनिक फैलाना है।

