मेरे लिए मेरी बेटियां
■ रमा भारती ( एक मां द्वारा अपनी बेटी “आराध्या” व “अभिषि” के प्रति शब्दों का सृजन जो हर बेटी
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■ रमा भारती ( एक मां द्वारा अपनी बेटी “आराध्या” व “अभिषि” के प्रति शब्दों का सृजन जो हर बेटी
Read More(दिनेश दर्पण ) यहां भी रखा है देखो उधर तो नहीं।ये किसी बेरुखी का असर तो नहीं। हम तो सोए
Read More(किशोर कुमार धनावत) आटे की रोटी,होती पतली मोटी,भूख मिटाती।जैसी बनालो,तिकोनी और गोल,स्वाद एक-सा।राजा या रंक,दोनों को ये चाहिए,फरक नहीं।जूठा गिराना,बंद
Read More✍ अंजु गुप्ता बात उस समय की है जब मेरा दसवीं कक्षा का रिजल्ट आने वाला था। उन दिनों रिजल्ट
Read Moreकोरोना काल… ( अलका जैन )शमसान दिवाली मना रहे मंज़र यूंकब्रिस्तान में लाशों के अम्बर कतारइंतजार मे जनाजे जमीं के
Read More( डॉ अलका अरोडा ) कोई जब पुकारता मुझकोभला कुछ चाहता मुझसेमैं सुनकर सुन ना पाती हूँसिर्फ मुझको बुलाता होजाने
Read More( अखिलानंद यादव ) बात बातन में बतिए सेबतिए पर धार धरेलन…लोगवा न जाने काहेनफरत के नशा करेलन… चिन्हे ना
Read More( रमेश चन्द्र सेठ, आशिक जौनपुरी ) कहा जा रहा है यहाँपे बहुत कुछ।मगर सत्य इससे अलग दिख रहा है।।दशा
Read More■ रमेश चन्द्र सेठ (आशिक़ जौनपुरी) (1) बिना रब के कोई सहारा न होगा।बिना उसकी मर्ज़ी इशारा न होगा।।करे लाख
Read More( सूबेदार पाण्डेय कवि आत्मानंद )मै भोजन के निवालों की कथा लिखता हूंं, आंख के आंसू जिगर, के दर्द पांवों
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