नफ़रत के नशा
( अखिलानंद यादव )
बात बातन में बतिए से
बतिए पर धार धरेलन…
लोगवा न जाने काहे
नफरत के नशा करेलन…
चिन्हे ना नीच अखियां ई,
आपन के बा गैर हो ।
जीनगी जियल का संभव बा,
आपन केहू बगैर हो ।।
तकिया बनाके छुड़ी के
काहे मुडिए तरे रखेलन….
लोगवा न जाने काहे
नफरत के नशा करेलन…..__१
झुठही नशा शराब के जग में,
भईल बा बदनाम हो ।
लोग यहां नफरत कें नशा,
करेलन खुलेयाम हो ।।
नफरत के नाच नंगा
देखी लोगवा उमड़ पड़ेलन……
लोगवा न जाने काहे
नफरत के नशा करेलन……_२
अखिलानंद निज आदत से,
बाडे बहुत मजबुर हो ।
नफरत भरी निगाहों से,
टूटल बा दिल जरूर हो ।।
मुश्किल में बा मोहब्बत
जे.. करे से उ.. डरेलन…..
लोगवा न जाने काहे
नफरत के नशा करेलन…._३
रचना – अखिलानंद यादव
ग्राम सभा – मलपुर लोहराई (कड़वरा)
रतनपुरा मऊ
मो – 9450461087

