रचनाकार

संस्मरण – दसवीं का रिजल्ट

✍ अंजु गुप्ता

बात उस समय की है जब मेरा दसवीं कक्षा का रिजल्ट आने वाला था। उन दिनों रिजल्ट स्कूल में आता था और विद्यार्थियों की लिस्ट नोटिस बोर्ड पर लगाई जाती थी। मैं दिल्ली में पुष्प विहार, साकेत के गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ती थी, जहां सुबह लड़कियों की कक्षाएं और दोपहर को लड़कों की कक्षाएं लगा करतीं थीं।

खैर, जिस दिन रिजल्ट आना था, हम सभी विद्यार्थी बहुत घबराए हुए थे कि पता नहीं क्या बनेगा। शाम के 4 बजे रिजल्ट की लिस्ट नोटिस बोर्ड पर टंग चुकी थी। लड़कों और लड़कियों के रिजल्ट एक ही नोटिस बोर्ड पर लगने की वजह से, भीड़ कुछ ज्यादा ही थी। वैसे भी बहुत से लड़के, लड़कियों के रिजल्ट में ज्यादा इंटरेस्टेड थे। वहां लड़कों का जमावड़ा लग चुका था। पता नहीं किस किस का रिजल्ट निहार रहे थे। उनकी वजह से हम लोग अपना रिजल्ट भी नहीं देख पा रहे थे। वे सब आपस में संस्कृत के नंबरों की ही बात कर रहे थे। बात सब जगह फैल चुकी थी कि किसी लड़की ने पिछले तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

मुझसे आगे एक लड़का खड़ा था। हिम्मत करके मैंने उससे कहा, “अगर आप हटो तो मैं अपना भी रिजल्ट देख लूं?”

साइड में होते हुए वो अनजान सा लड़का मुझसे बोला, “तुम्हें पता है, अंजु गुप्ता के संस्कृत में 95 आए हैं। आई हुई है क्या वो? “

भौचक्की सी मैं उस अनजान लड़के की शक्ल देख रही थी जो मेरा ही रिजल्ट, मुझे बता कर, मेरे बारे में पूछ रहा था 😂।

यह घटना आज भी मुझे पुराने दिन याद दिला देती है।

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