कविता : गर्मी
@ राजेश कुमार सिंह… मई-जून की गर्मी जब, अपना रौद्र रूप दिखाती है। पशु-पक्षी लोग-बाग को, यह विचलित कर जाती
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@ राजेश कुमार सिंह… मई-जून की गर्मी जब, अपना रौद्र रूप दिखाती है। पशु-पक्षी लोग-बाग को, यह विचलित कर जाती
Read More@ शब्द मसीहा केदारनाथ… “अरे! कैसे अजीब दोस्त हो यार? कुछ मालूम तो रखना चाहिए दोस्तों के बारे में ।”
Read Moreकुछ तो लोग कहेंगे… बृजेश गिरि अब उनकी बद्दुआओं का असर नहीं होता, हर दर्द दिल का यूँ चश्म-ए-तर नहीं
Read More@ मीनाक्षी गर्ग… भीषण आंधी में भी दम नही ,उखाड़ कर अस्तित्व मिटा दे ,उस वृक्ष का, जिसकी जड़ें ,फौलाद
Read More० केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह व राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय सहित कई अतिथि रहे
Read More० कहानी को संक्षिप्त कर लघुकथा नहीं बन सकती है : ऋचा वर्मा० वैश्विक लघुकथाकारों की रचनाओं का अध्ययन कर
Read Moreशब्द मसीहा केदारनाथ… पोता काफी समय से डिग्री लेकर भी घर में बैठा था। पिता अक्सर उसे डाँटते, ताना मारते
Read More@ मनोज कुमार सिंह… हे श्रेष्ठ, सर्वोत्तम, महान और बुद्धिमान मानव !कहाँ रहते हो आजकल ?कहीं दिखते नहीं हो,अनगिनत अत्याधुनिक
Read More@ साहु रजनीश प्रकाश… मेरे पापा प्यारे पापा,याद आपकी आती है।आंखें मेरी भर आतीं हैं ,पापा क्युं हमें सताते हो।।
Read Moreफतेहपुर/मऊ। फतेहपुर ताल नरजा के गांव में 9 मई को लोकायन संस्कृति न्यास आजमगढ़ के तत्वावधान व कवियित्री आशा
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