2027 में मधुबन से चुनाव लड़ेंगे मुरली मनोहर पांडेय? NCP में बढ़ी सियासी हलचल
मऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रदेश महासचिव एवं प्रवक्ता मुरली मनोहर पांडेय की चुनावी भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह है कि क्या मुरली मनोहर पांडेय खुद विधानसभा चुनाव मैदान में उतरेंगे या पार्टी की चुनावी रणनीति को यूपी में मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
छात्र राजनीति से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले मुरली मनोहर पांडेय को संगठन और चुनावी रणनीति का अनुभवी चेहरा माना जाता है। उन्होंने राष्ट्रवादी विद्यार्थी कांग्रेस में राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रवक्ता तथा हिंदी भाषी प्रदेशों के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उत्तर प्रदेश में राष्ट्रवादी विद्यार्थी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और फिर राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। वे राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, संगठन महामंत्री एवं प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें संयोजक की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
बताया जाता है कि जम्मू-कश्मीर, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के चुनावों में भी मुरली मनोहर पांडेय को पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। यही वजह है कि उन्हें पार्टी के चुनावी रणनीतिकारों में गिना जाता है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अब उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पिछले करीब एक वर्ष से मुरली मनोहर पांडेय द्वारा बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की तैयारियां किए जाने की बात सामने आ रही है।
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, यदि आगामी विधानसभा चुनाव में NCP और भाजपा के बीच गठबंधन होता है तो मधुबन विधानसभा सीट से मुरली मनोहर पांडेय प्रबल दावेदार हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक उनके चुनाव लड़ने या किसी सीट से प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
ऐसे में 2027 के चुनाव में मुरली मनोहर पांडेय की भूमिका क्या होगी—वे खुद मधुबन से चुनावी मैदान में उतरेंगे या पार्टी की रणनीति को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी संभालेंगे—इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। आने वाले समय में गठबंधन की तस्वीर और पार्टी के निर्णय से इस सियासी सवाल का जवाब साफ होने की उम्मीद है।

