टीबी उन्मूलन के लिए सोशल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए घरेलू फंड जुटाने की नई पहल
नई दिल्ली: भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए देश के भीतर वित्तीय संसाधन जुटाने को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अमेरिकी विदेश विभाग समर्थित TB Implementation Framework Agreement (TIFA) Project के अंतर्गत John Snow India Pvt. Limited (JSI India) ने नई दिल्ली में “Leveraging India’s Social Stock Exchange for TB & Health” विषय पर राष्ट्रीय बैठक आयोजित की।
इस पहल का मकसद स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) को भारत के Social Stock Exchange (SSE) के माध्यम से घरेलू पूंजी जुटाने के लिए तैयार करना है। बैठक में National Stock Exchange (NSE), Securities and Exchange Board of India (SEBI), केंद्रीय टीबी प्रभाग-स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, विकास साझेदारों और दानदाताओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
SEBI Social Stock Exchange Advisory Committee की सदस्य ज्योत्सना सितलिंग ने कहा कि SSE गैर-लाभकारी संगठनों के लिए एक अहम अवसर उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से NPOs अपने कार्यों के मापनीय परिणामों पर अधिक ध्यान दे सकते हैं और SSE के निर्धारित मानकों के अनुरूप काम करते हुए निवेशकों का विश्वास मजबूत कर सकते हैं।
केंद्रीय टीबी प्रभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. रघुराम राव ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि Social Stock Exchange के माध्यम से घरेलू वित्त पोषण को बढ़ावा मिलने से टीबी उन्मूलन अभियान में आम नागरिकों और रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। इससे देशभर में चल रहे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों से अधिक लोगों को सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।
NSE के प्रतिनिधि विनीट शास्त्री और कौशल कुमार ने जानकारी दी कि वर्ष 2023 में शुरुआत के बाद से SEBI द्वारा विनियमित Social Stock Exchange पर 190 से अधिक NPO पंजीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा 16 से अधिक परियोजनाएं सूचीबद्ध की गई हैं और ₹42 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि हाल में किए गए नीतिगत बदलावों के अंतर्गत कंपनियां अपने Corporate Social Responsibility (CSR) बजट का 10 प्रतिशत तक Social Stock Exchange के माध्यम से खर्च कर सकती हैं। इस बदलाव से गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए देश के भीतर फंड जुटाने की संभावनाएं और बढ़ी हैं।
बैठक में NPOs को SEBI अनुपालन, फंड जुटाने से जुड़े दस्तावेज और सोशल ऑडिट के मानकों की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। प्रतिभागी संगठनों ने टीबी की जांच, उपचार और सामुदायिक सहयोग से संबंधित कई परियोजनाएं तैयार कीं। इनमें से कुछ प्रभावी परियोजनाओं को Social Stock Exchange पर आधिकारिक लिस्टिंग के लिए आगे बढ़ाया गया।
बैठक के समापन अवसर पर NIAMT, रांची के चांसलर अरुण कुमार झा ने कहा कि फंड जुटाना दान को अधिक सम्मानजनक और व्यवस्थित रूप देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि Social Stock Exchange के जरिए दानदाता को यह भरोसा मिलता है कि जिस NPO को वह सहयोग दे रहा है, उसकी विश्वसनीयता और कार्यप्रणाली निर्धारित मानकों के अनुरूप है तथा वह SEBI की निगरानी और नियामकीय व्यवस्था के दायरे में काम करता है। इससे दानदाताओं का विश्वास बढ़ता है और सामाजिक क्षेत्र में पारदर्शिता को मजबूती मिलती है।
JSI India के TIFA Project Director वेंकटेश रोद्दावर ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे NPOs को SSE की लिस्टिंग प्रक्रिया में सहयोग देने से स्वास्थ्य समानता के लिए टिकाऊ और बाजार आधारित घरेलू वित्त पोषण का एक भरोसेमंद रास्ता विकसित किया जा सकेगा।
यह पहल भारतीय गैर-लाभकारी संगठनों को Social Stock Exchange पर सूचीबद्ध होने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में JSI-TIFA की एक शुरुआत है। इसका लक्ष्य भारत में सामाजिक सहयोग और दान की मजबूत परंपरा को आधुनिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ते हुए टीबी उन्मूलन के साथ-साथ व्यापक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए टिकाऊ घरेलू पूंजी जुटाना है।


