मधुबन में “भरत” की एंट्री से बढ़ा सियासी संग्राम!
@ आनन्द कुमार…
रामायण में “कैकेयी” ने “भरत” के लिए सत्ता मांगी, तो “राम” हँसते-हँसते वन को चले गए। “भरत” के सामने सिंहासन था, लेकिन उन्होंने उस पर बैठना स्वीकार नहीं किया। “राम” की खड़ाऊँ सिंहासन पर रखकर राजकाज संभाला।
लेकिन राजनीति की रामायण में कहानी कुछ अलग है।
यहाँ वर्तमान के “भरत” स्वयं मधुबन की सत्ता पाने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। “रामराज” आने से पहले से अब तक भाजपा ने जब उन्हें मधुबन की सत्ता सौंपना उचित नहीं समझा, तो अब “भरत” माया के सहारे हाथी पर सवार होकर मधुबन की शहीदी धरती के रणक्षेत्र में उतर पड़े हैं।
अब सवाल यह है कि इस राजनीतिक रण में भाजपा की ओर से कौन सामने आएगा?
अगर मुकाबले में “मोदी के हनुमान” उतरते हैं, तो लड़ाई आसान नहीं होगी। अगर “योगी के मत चूको चौहान वाले राम” मैदान में आते हैं, तब भी “भरत” के सामने चुनौती कम नहीं होगी।
और अगर राजनीति के अखाड़े के पहलवान “दारा” को मैदान में उतारा गया, तो मधुबन का यह सियासी सफर और भी रोमांचक और मुश्किल भरा हो सकता है।
इन चुनौतियों के बीच मधुबन से चुनकर सदन तक पहुँचना सिर्फ “भरत” के लिए ही नहीं, बल्कि भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में “भरत” सभी के लिए मुसीबत खड़ी करते नजर आ रहे हैं।
क्योंकि मधुबन की धरती पर अब मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीकों, संगठन की ताकत और व्यक्तिगत प्रभाव का भी होगा।
भाजपा का सिंबल किसे मिलता है, इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। उसके बाद ही साफ होगा कि मधुबन में सपा अपना “संबल” किस ताकत के साथ दिखा पाती है।
इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती अपने प्रभारी को अंतिम वक्त तक प्रत्याशी बनाए रखती हैं या नहीं, यह भी देखने वाली बात होगी। हालांकि, इतना जरूर है कि वर्तमान में मायावती हर विधानसभा सीट पर ऐसे “कोहिनूर” खोजकर लाने की कोशिश करती नजर आ रही हैं, जो उनकी पार्टी के लिए संजीवनी का काम कर सकें।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि भाजपा के “रामराज” में वर्तमान के “भरत” ने मधुबन की सीट को परिस्थितियों के हिसाब से ऐसे राजनीतिक मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ अगला कदम किसी एक प्रत्याशी का नहीं, बल्कि पूरी चुनावी रणनीति का भविष्य तय कर सकता है।
मधुबन का रण सज चुका है… अब देखना है कि “राम” कौन बनता है और “भरत” की राह कौन रोकता है!

