मऊ कलेक्ट्रेट में गरजा सवर्ण एकता मंच, UGC प्रावधानों की समीक्षा और समान आरक्षण की उठी मांग
राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा पांच सूत्री मांग-पत्र, सामान्य वर्ग आयोग के गठन और EWS में सुधार की मांग
मऊ। आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, यूजीसी के वर्ष 2026 के नवीन प्रावधानों की समीक्षा एवं वापसी, एससी/एसटी अधिनियम के कथित दुरुपयोग पर प्रभावी रोक, सवर्ण/सामान्य वर्ग आयोग के गठन तथा EWS व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुक्रवार को मऊ कलेक्ट्रेट परिसर स्थित धरना स्थल पर सवर्ण एकता मंच के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। सुबह 10 बजे शुरू हुआ धरना शाम चार बजे तक चला। कार्यक्रम की संरक्षकता उमाशंकर सिंह ने की, अध्यक्षता ऋषिकेश पांडेय ने की, जबकि संचालन संतोष सिंह ने किया। विजय प्रताप सिंह संयोजक रहे।

धरना-प्रदर्शन के बाद मंच की ओर से राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी मऊ के माध्यम से पांच सूत्री मांग-पत्र सौंपा गया। मांग-पत्र में कहा गया कि आंदोलन का उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकारों का विरोध करना नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के लिए समान अवसर, पारदर्शी व्यवस्था, संवैधानिक समानता और सामाजिक समरसता सुनिश्चित करना है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग
मांग-पत्र में आरक्षण व्यवस्था की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक प्रभावशीलता की व्यापक और समयबद्ध समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय आयोग गठित करने की मांग की गई। मंच ने कहा कि जरूरतमंद लोगों तक सरकारी अवसरों का वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए आर्थिक स्थिति, पारिवारिक आय, संपत्ति तथा सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन जैसे व्यावहारिक मानकों को भी समीक्षा का आधार बनाया जाना चाहिए।
UGC के नए प्रावधानों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग
मंच ने वर्ष 2026 में यूजीसी से संबंधित नवीन नियमों एवं प्रावधानों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष समीक्षा की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में प्रवेश, नियुक्ति और शैक्षणिक अवसरों में पारदर्शिता, योग्यता तथा समान अवसर सुनिश्चित होना चाहिए। किसी भी प्रावधान से यदि किसी वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ असमानता उत्पन्न होती है तो उसमें आवश्यक संशोधन अथवा उसे निरस्त करने की मांग की गई।
एससी/एसटी कानून के कथित दुरुपयोग पर निगरानी तंत्र की मांग
मांग-पत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के संरक्षण के लिए बनाए गए कानूनों की मूल भावना का सम्मान करते हुए उनके संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी एवं निष्पक्ष जांच तंत्र विकसित करने की मांग की गई। मंच ने कहा कि झूठे अथवा दुर्भावनापूर्ण मामलों की निष्पक्ष जांच हो और निर्दोष पाए जाने वाले लोगों को शीघ्र कानूनी राहत मिलनी चाहिए।

सामान्य वर्ग आयोग और EWS में सुधार की मांग
सवर्ण/सामान्य वर्ग के गरीब किसान, मजदूर, बेरोजगार युवा, विद्यार्थी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र एवं राज्यों में सवर्ण/सामान्य वर्ग कल्याण आयोग अथवा कल्याण बोर्ड गठित करने की मांग भी उठाई गई।
इसके अलावा EWS प्रमाण-पत्र की वैधता और प्रक्रिया को सरल एवं व्यावहारिक बनाने, पात्र अभ्यर्थियों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ आयु सीमा में उचित छूट समेत अन्य न्यायसंगत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
मंच ने राष्ट्रपति से पांचों मांगों पर केंद्र सरकार एवं संबंधित संवैधानिक/वैधानिक संस्थाओं को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर उच्चस्तरीय समीक्षा और नीतिगत कार्रवाई सुनिश्चित कराने का आग्रह किया। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति समानता, न्याय, पारदर्शिता और प्रत्येक नागरिक को समान अवसर उपलब्ध कराने में निहित है।
विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कार्यकर्ता और समर्थक
धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लोग पहुंचे। रतनपुरा क्षेत्र से ऋषिकेश मिश्रा, परमात्मा सिंह, रामकृपाल सिंह और आदर्श पांडेय; घोसी से हंसनाथ तिवारी, कृपाशंकर सिंह, डॉ. नागेंद्र सिंह, अभिषेक सिंह और नंदकिशोर; कोपागंज क्षेत्र से आशीष राय, बबलू राय, छट्टू सिंह, धनंजय सिंह, बृजेंद्र सिंह और गोल्डन सिंह शामिल रहे।
मधुबन क्षेत्र से देवेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह, विजय शंकर सिंह, धनंजय सिंह प्रधान, रंजीत सिंह, प्रभाकर सिंह और विद्यासागर सिंह पहुंचे। मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र से अरविंद सिंह (पूर्व अध्यक्ष, घोसी डिग्री कॉलेज), उमाशंकर सिंह, बृज बिहारी सिंह, सतीश सिंह, सूर्यभान सिंह, नागेंद्र सिंह, बुच्ची सिंह, भीष्म सिंह, माखन सिंह और बबलू सिंह की सहभागिता रही।
परदहा क्षेत्र से बलवंत सिंह, जितेंद्र सिंह (अध्यक्ष, करणी सेना), बलवंत सिंह अहिलाद, नंदकिशोर सिंह, पवन पांडेय, रामकरण सिंह, राघवेंद्र, अतुल, यशवंत सिंह, राजू सिंह रकौली, सुनील सिंह, रणबीरपुर, अमरजीत सिंह ‘संत’ और बृजेश सिंह हरपुर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
धरना स्थल पर दिनभर विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा होती रही। आयोजकों ने इसे समान अवसर, पारदर्शिता और नीतिगत सुधार की मांग से जुड़ा आंदोलन बताया।
















