कविता : पापा
@ रश्मि लहर, लखनऊ जब गरीबी से मिला खुरचा ये तन आधा कभी । सांत्वना का लेप लेकर आ गए
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@ रश्मि लहर, लखनऊ जब गरीबी से मिला खुरचा ये तन आधा कभी । सांत्वना का लेप लेकर आ गए
Read Moreकविता… पिता का उपहार ———————– 0 सिद्धेश्वर ———– 📀 बेटे ने दिया पिता जी को उपहार उनके जन्मदिन पर. चंद
Read More@ राजेश कुमार सिंह… मई-जून की गर्मी जब, अपना रौद्र रूप दिखाती है। पशु-पक्षी लोग-बाग को, यह विचलित कर जाती
Read More@डॉ सरला सिंह स्निग्धा, दिल्ली जीवन कठिन हुआ पाषाणी तड़प रही देखो जनता। सिर पर छत अम्बर का उनके भाग्य
Read More✍️ रोशनी जायसवाल… 1- उम्मीद और आस की, पहचान है मेरे पिता… बरगद की गहरी छांव जैसे, मेरे पिता। जिंदगी
Read More@ विजय वाजिद… हर नज़र में भी रहे हुस्न-ए-ज़माना भी बने हां मगर हर तीर का थे हम निशाना भी
Read More@ राज प्रिया रानी… आसूं हमारे बह न पाए की तुम कहीं निर्झर बह न सको, नयन सलाखें बंद रखूं
Read More♦️ शायर : सिद्धेश्वर… 1222 1222 1222 1222 लुटा उल्फ़त की दुनिया भी न अपने हाथ कुछ आया l हमारी
Read More@ अशोक कुमार ‘अश्क चिरैयाकोटी’… जो दिल की बारगाह में दाख़िल नहीं हुआ, उस पर फ़िदा किसी भी तरह दिल
Read More@रोशनी जायसवाल… नारी तेरे रूप अनेक, सभी युगों और कालों में है तेरी शक्ति का उल्लेख । ना पुरुषों के
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