रचनाकार

रचनाकार

तूने निष्ठुर बन भाई की, राखी को कैसे भुलाया, घर से भागते वक़्त माँ का,
आँचल याद न आया,

० समाज की उन नादान लड़कियो को लेखक का यह संदेश, जो लडकियाँ प्यार के चक्कर में पड़कर, अपने माँ-बाप

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रचनाकार

थोडा सब्र रख तुझसे रिश्ता भी खत्म कर दूंगी, बस मुझे इन्तजार है मेरी धङकनों के रुक जाने का

✍🏻 मीना सिंह राठौर, नोएडा उत्तर प्रदेश उससे ताल्लुक ही कुछ ऐसा रहा है मेरा,की जब भी सोचा उसे तो

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