रचनाकार

लद्युकथा : चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है

@ शब्द मसीहा केदारनाथ…

आज आर्यन जब घर लौटा तो बहुत ज्यादा खुश था। हमेशा की तरह घर में घुसते ही अपने अब्बू और अम्मी के पैर छूकर सलाम किया और फिर न जाने क्या हुआ कि सोफे पर बैठे हुए अपने अब्बू के पैरों पर अपना सिर टिकाकर जमीन पर बैठ गया। आर्यन के अब्बू उसके सिर को सहलाने लगे और उससे पूछा-

“आज क्या बात है? अपने अब्बू से इतना प्यार क्यों जता रहे हो?”

आर्यन उनकी गोद में सिर रखे हुए ही बोला- “बस कुछ खास नहीं, अपनी मेहनत से आज आपका एक ख़्वाब पूरा कर दिया मैंने।”

” मेरा ख्वाब? मैं तो खुद अपने ख्वाब पूरे नहीं कर पाया। कभी अपनों ने सताया, कभी दोस्तों ने और सबसे ज्यादा मेरी किस्मत ने मुझे सताया। मैंने इंसान होने की बहुत बड़ी कीमत चुकाई है बेटा।” आर्यन के अब्बू बोलें।

“नहीं, मैं आपके उन बहुत सारे सपनों के बारे में नहीं कह रहा हूँ, मैं आपके उस सपने के बारे में कह रहा हूँ, जो कभी आपने अपनी मेहनत से साकार किया था, और फिर से वह आपके लिए सपना बन गया। सोचिए तो…. वह क्या था?” आर्यन ने कहा ।

“तुम तो जानते हो बेटा कि जब से मुझे स्ट्रोक हुआ है, मैं बहुत सारी चीजों को भूल जाता हूँ। मुझे तो खुद भी याद नहीं कि मैंने अपना कौन-सा सपना साकार किया था और फिर वह सपना मेरे लिए सपना बन गया।” अब्बू उसके सिर पर हल्की-सी चपत लगाते हुए बोले।

“आपको कुछ भी याद नहीं आ रहा? अच्छा एक बात तो आपको याद होगी।” आर्यन ने पूछा।

“कौन-सी बात बेटा?”

“याद कीजिए एक बार ईद का मौका था, और मैंने आपसे पूछ लिया था कि ईद पर क्या अल्लाह मियां हमें कपड़े देते हैं? तब आपने मुझसे तो कुछ नहीं कहा था, पर आपने लिखा था…नहीं, बेटा! कपड़े तो बाप देता है। और आपने लिखा ये भी था कि एक बाप का सिर झुक गया। वैसे तो मैं आपको ज्यादा नहीं पढ़ता था क्योंकि मेरे पास फेसबुक चलाने के लिए समय ही नहीं होता था, पर एक रोज रात को जब मैं अपनी सी ए की ट्रेनिंग कर रहा था, तब मैंने आपकी फेसबुक वॉल पर इस बात को पढ़ा था। और तब ही मुझे आपकी उस बेबसी का अंदाजा हुआ था, और मुझे यह भी पता चला था कि आप दुनिया के सबसे बेहतरीन बाप हैं। आपने अपनी आधी जिंदगी का त्याग करके रखा ताकि मैं बिना लाड प्यार के, जीवन की कठिनाइयों का खुद सामना कर सकूं। उस वक्त मैं नहीं जानता था कि बिना आंसुओं के भी रोया जा सकता है। वैसे तो दुनिया के जितने भी लफ्ज हैं वह किसी बाप के प्यार को नहीं बता सकते, उसे लिख नहीं सकते। पर चंद लफ्जों ने मेरी जिंदगी को और मेरी नजरों में आपके दर्ज़े को और भी ऊंचा कर दिया था।” आर्यन ने कहा।

“अरे बच्चे, छोड़ो न पुरानी यादों को। मैं उन दिनों में परेशान रहता था, हो सकता है किसी और वजह से लिखा होगा…. तुम्हारे लिए ऐसा नहीं लिखा था बेटा।” अब्बू बोले।

“पर ऐसा सचमुच हुआ था। भले ही मेरे लिए न लिखा हो, लेकिन एक बाप के दिल की तड़प अपने बेटे के लिए आपने बहुत ही अच्छे अल्फाजों में बयान की थी। शायद मैं इतना बड़ा नहीं हुआ था, इतना समझदार भी नहीं कि जैसा आप चाहते थे वैसा मैं समझ पाता।” आर्यन अब्बू के पैरों पर सिर रखे सुबक रहा था। उसे मालूम था कि अब्बू उसे कभी परेशान नहीं देख सकते, मगर उन चोर आंसुओं का क्या ….जिनपर किसी का बस नहीं चलता ।

जब अब्बू को गीलेपन का अहसास हुआ तो उन्होने आर्यन के चेहरे को देखा।

“अबे! किसी कहानी के हिस्से को पढ़कर अपने दिल से लगा बैठा। अभी तक तू बड़ा नहीं हुआ ।” और अपने हाथों से उसकी आँखों के आंसुओं को पोंछ दिया।

“बड़ा बेशक नहीं हुआ अब्बू , लेकिन बाप तो उसी दिन बन गया था । और सोच लिया था कि पूरी कोशिश करूंगा कि अपने आसपास के किसी बाप को ऐसा न करना…कहना पड़े, ऐसा न लिखना पड़े।” आर्यन , अब्बू की आँखों में देखते हुए बोला।

“लगता है ये ज्यादा ही बड़ा हो गया। अब बड़े होने का सबूत दे दिया है, तो इसकी शादी भी कर ही देते हैं।” पास ही बैठी प्याज छीलती हुई अम्मी ने कहा।

“हाँ, अगर ये राजी है तो ।” अब्बू ने कहा।

“अभी नहीं, मुझे नहीं पता कि शादी के बाद का वक़्त कैसा होगा, बस मैं चाहता हूँ कि आपकी सारी खुशियों को एक बार फिर से लौटा लाऊँ।” आर्यन ने कहा।

“ये भी ख़ूब कहा बेटा … दिल खुश हुआ कि बेटे ने माँ-बाप की खुशियों के बारे में इतना सोचा । अल्लाह तुम्हें सारी खुशियाँ अता फरमाए ….आमीन।” अम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा।

“अबे! हमारे बारे में इतना सोचने की क्या जरूरत है ? हम लोग खुश हैं और तुम्हें खुश और कामयाब देखकर तो दिल और भी खुश हो जाता है बेटा। इतना प्यार मत किया करो …. अब दिन ही कितने बचे हैं ….हा हा हा।” अब्बू ने हँसते हुए कहा।

“आपको प्यार करना मेरा हक़ भी है और फ़र्ज़ भी है। इसे तो आप भी मुझसे नहीं छीन सकते। मैं आपके बाजुओं के वो वी मार्क वाली मछलियाँ फिर से देखना चाहता हूँ । मुझे पता है कि दुनिया का कोई टॉनिक या दवा उसे नहीं बना सकता, पर मोहब्बत और खुशहाली जरूर उम्र को और ताकत को लौटा लाती है। आज आपके लिए एक तोहफा लाया हूँ ।” आर्यन ने कहा।

“अबे! तू ख़ुद सबसे बड़ा तोहफा है हमारे लिए ख़ुदा का । तू अपने बारे में सोचा कर। बेकार ही मेरे लिए तोहफा लाया है, अब क्या उम्र बची है तोहफे कबूल करने की?” अब्बू ने मुस्कुराते हुए कहा।

“उम्र तो अब भी उतनी ही बची है , जितनी तब थी जब मैं पैदा हुआ था। ये लीजिये …आपकी कार की चाबियाँ और ये कुछ पैसे हैं। आप दोनों बाहर जाकर घूमकर आइये। आज मैं आप दोनों के लिए खाना बनाऊँगा।” आर्यन ने चाबियाँ अब्बू के हाथ में रखते हुए कहा।

“कार ….. कार की क्या जरूरत थी ? कुछ अपने लिए भी सोचा होता।” अम्मी हैरान होते हुए बोलीं।

“मेरे लिए तो कंपनी की कार आती ही है। मुझे क्या जरूरत है …. जाइए और हँसते ज़ख्म फिल्म का गाना गुनगुनाइए ।” आर्यन हँसते हुए बोला।

“अबे! कौन-सा गाना ?” अब्बू उसकी तरफ देखते हुए मुस्कुराए।

“वही ….जो आप मुझे अपने साथ की सीट पर बैठकर गुनगुनाते थे ….चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है ….हा हा हा।” अम्मी ने ठहाका लगाते हुए कहा।

“चलो, बैठो गाड़ी में । अब इनके गुनगुनाने का इंतज़ाम कर के आते हैं। शब्बीर साहब के दौलतखाने पर चलकर इन का रिश्ता ही पक्का कर आते हैं …. रिटर्न गिफ्ट भी तो शानदार होना चाहिए न बेगम ….हा हा हा।” कहते हुए अम्मी-अब्बू बाहर चले गए और आर्यन खुशी से झूम उठा।

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