फ़िदा भी न क्यूँ हो ये ‘हरिलाल’ तुझपे, ग़ज़ल तेरे जलवे निराले बहुत हैं
हरिलाल राजभर… गलतफहमियाँ जो भी पाले बहुत हैं,पड़े जह्न में उनके छाले बहुत हैं । सदा तंज कसना ही जिनकी
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हरिलाल राजभर… गलतफहमियाँ जो भी पाले बहुत हैं,पड़े जह्न में उनके छाले बहुत हैं । सदा तंज कसना ही जिनकी
Read More@ अशोक कुमार यादव… मैं पहले कुशाग्र मानव था,लोगों ने बनाया मुझे पशु।ईर्ष्या,द्वेष,जाति भेदभाव,देख मंजर निकला आंसू।। भ्रष्टाचार रूपी दानव
Read Moreअभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली… सूने करके महल, अटारीबच्चे चले है परदेश…बड़े बड़े घर मे रहे सदाकैसे भाएगे वो फ्लैट…..काम यहाँ भी
Read More@ डा. प्रमोद कुमार अनंग… हमको क्या मजबूर करोगे।किससे – किससे दूर करोगे।। जब देखो तब मेरी चर्चा।अब कितना मशहूर
Read Moreसंतोष कुमार वर्मा “कविराज”, कोलकाता, पश्चिम बंगाल… सोमेन के पिता रमेश साह मिल में ही काम करके सोमेन और श्याम
Read More@ मीना सिंह राठौर, नोएडा… राहे जुदा जुदा है तो कुछ गम न कीजिये !!हम आलम-ए-ख्याल में हैं बस आप
Read More@ शब्द मसीहा केदारनाथ… “अरे! सुनती हो ।” पति ने कमरे में से ज़ोर से पुकारा ।“बहरी नहीं हुई हूँ
Read More@ अशोक कुमार यादव… जागो, जागो, जागो, जागो, जागो। नित नया सवेरा, तुमको बुला रहा। दूर परिंदे बैठे छत पे,
Read More@ अभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली से… एक दिन होगे कंकरीट के जंगल,पेड़ बीच पाषाण किला बन जाएगा।आस पास होगे इतिहास बताने
Read Moreउमंग युवा कवि सम्मेलन पटेल काॅलेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूटशन रालामंडल में हुआ सम्पन्न कुमार अशोक के श्रृंगार रस से भरे
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