रचनाकार

इश्क़ में इक पढ़ाकू लड़की करने लगी आवारगी, इश्क़ में इक आवारा लड़का पढ़ाई करने लगा

उमंग युवा कवि सम्मेलन पटेल काॅलेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूटशन रालामंडल में हुआ सम्पन्न

कुमार अशोक के श्रृंगार रस से भरे ‘चांद पागल हो गया है…गीत’ पर थिरकने लगे श्रौता, लगे वन्स मौर के नारे!

इंदौर। (जितेन्द्र शिवहरे) पटेल ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूटशन काॅलेज रालामंडल के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी हरीश शर्मा ने बताया कि युवा कवियों ने 30 मार्च बुधवार को दोपहर 2:30 से 4 बजे तक उमंग युवा कवि सम्मेलन में भाग लिया। यह कवि सम्मेलन पटेल काॅलेज रालामंडल इंदौर पर दोपहर ढाई बजे से चार बजे तक आयोजित हुआ। कवियों में कवि जीत शिवहरे जुगनू, पुरुषोत्तम कुलकर्णी, शिवानी उदेनिया शान, ब्रजेश कुमार मस्ताना और कुमार अशोक काव्यपाठ ने काव्यपाठ किया। काॅलेज प्रतिनिधि हरीश शर्मा ने कवियों का स्वागत किया। श्रौताओं से खचाखच भरे ऑडिटोरियम हाॅल में ओज कवियत्री शिवानी उदेनिया ‘शान’ ने स्टूडेंट्स की मांग पर श्रृंगार गीत पढ़ा। युवा कवि पुरुषोत्तम कुलकर्णी की शेरों श़ायरी ने जमकर वाह-वाही लुटी। कवि जीत शिवहरे ‘जुगनू’ ने मदमस्त शानदार गीत ‘मेरे दिल में तुम इस तरह समा जाओ…जितना भी जाऊं दूर उतना करीब आओ…!’ पढ़कर श्रौताओं को गीत दौहराने पर मजबूर कर दिया। कुमार विश्वास की टू कापी कुमार अशोक के गीतों ने वन्स मौर के नारे लगवाये। संचालन कर रहे युवा हास्य कवि ब्रजेश कुमार मस्ताना ने देर तक श्रौताओं को हंसाया। हरिश शर्मा ने आभार प्रदर्शन किया।

यह जानकारी जितेन्द्र शिवहरे ने दी।

कवियों की रचनाएँ-

बात बात पर खुद से झगड़ा-लड़ाई करने लगा
क्यूँ बे क्या वे अबे से अब भाई भाई करने लगा
इश्क़ में इक पढ़ाकू लड़की करने लगी आवारगी
इश्क़ में इक आवारा लड़का पढ़ाई करने लगा।

-ब्रजेश मस्ताना

तुम जो समझे बातें मेरे ज़हन की है
नैनों को प्रतीक्षा तुम्हारे आगमन की है
थोड़ा वक़्त निकालों और सुनों मेरी भी
कुछ बातें करनी है जो मेरे मन की है
-पुरुषोत्तम कुलकर्णी

रंग अधरों से चुराकर
रात रानी खिल गयी,
छलकी अँखियों से सुधा
और यामिनी में मिल गयी ।
देखकर तुझको शरम से
बादलों में खो गया,
चाँद पागल हो गया,,,

कुमार अशोक

पूजा जिस राम को मैंने शिशुता से यौवन तक आस लिए,
आस उस राम की अनायास मिट सकेगी क्या…??
कल की कल्पना में मेरी, हिन्द जो हर पल बसा,
किसी की कल्पना में चाह, मेरी बस सकेगी क्या..??

©️ शिवानी उदेनिया ‘शान’
इंदौर, मध्यप्रदेश

सात सुरों के संगम से संगीत बनता है
शब्द श्रृंगार संयोजन से तब गीत बनता है
मिलकर बिछड़ते है दुनिया में बहुत लोग
हृदय के तार छेड़े वो मनमीत बनता है।

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