रचनाकार

सूने करके महल अटारी, बच्चे चले है परदेश…

#Abhilasha Agrawal

अभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली…

सूने करके महल, अटारी
बच्चे चले है परदेश…
बड़े बड़े घर मे रहे सदा
कैसे भाएगे वो फ्लैट…..
काम यहाँ भी था लेकिन
कामयाब बनने की है रेस…
छोटी थी चिल्लर सी खुशियाँ
उनके भाए पर बड़े कैश….
सूने करके महल, अटारी
बच्चे चले है परदेश…..
बड़ी शिक्षा पाने की खातिर
भूल गए परिवेश….
मात पिता को प्यार जताने
आ जाते है रोज संदेश…..
छोड़कर सच्ची बड़ो की छाया
बैठा सुख सुविधाओ को लपेट…
आजा बेटा लौट कर गांव को
सूखे पड़े तेरे खेत…..
सूने करके महल………..
बच्चे……………

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