रचनाकार

विकास जब विवेक को लालच में फंसाएगा, यह दिन देखना तुम बहुत ही जल्दी आएगा

@ अभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली से…

एक दिन होगे कंकरीट के जंगल,
पेड़ बीच पाषाण किला बन जाएगा।
आस पास होगे इतिहास बताने वाले,
छूने पर भी भुगतान लगाया जाएगा।
सूखी नदियों के पद चिंहों को बस देखेगे,
जल का दाम पेट्रोल के बराबर जाएगा।
फूल पत्तो और फलो की होगी प्रदर्शनी,
पहले क्या था उपयोग सुनाया जाएगा।
विकास जब विवेक को लालच में फंसाएगा,
यह दिन देखना तुम बहुत ही जल्दी आएगा।

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