रचनाकार

“संभलना सीखा”

@ डा. प्रमोद कुमार अनंग…

हमको क्या मजबूर करोगे।
किससे – किससे दूर करोगे।।

जब देखो तब मेरी चर्चा।
अब कितना मशहूर करोगे।।

इतना हमको याद करो मत।
लगता है मगरुर करोगे।।

कहीं बुराई कहीं दुहाई।
अपने दिल को चूर करोगे।।

खुशियां देकर खुश हो जाओ।
नया – नया दस्तूर करोगे।।

जान लगाकर पीछे खींचो।
एक दिन तुम्हीं गुरूर करोगे।।

अब आदत से बाज तो आओ।
कितना अधिक कसूर करोगे।।

चुगली हुईं संभालना सीखा।
भ्रम में हो बेनूर करोगे।।…“अनंग”

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