लद्युकथा : पलायन

✍️सपना चन्द्रा, कहलगाँव भागलपुर बिहार
“आ जा रमेश !.रोटी खा ले!.थोड़ा हाथों को भी आराम दे। पुताई करते-करते बाँह अकड़ गई है। कुछ देर सुस्ता लेते है फिर हमलोग काम करेंगे। “
“आता हूँ संतोष भैया!!.थोड़ा सा रह गया बस ,
अपने हाथ-मुँह को अंगोछे से पोछता हुआ बोला-
“आ गया ..निकालिए रोटी। “
रमेश चुपचाप रोटी खाता हुआ,बीच -बीच में आँखे पोछ लेता।
“क्या हुआ रमेश..इतना मायुस क्यूँ हो..?”
“घर की बहुत याद आ रही है भाई..
आज सुधा का फोन आया था,
बहुत देर खामोशी रही, कुछ कहना चाह रही थी पर उसने कुछ नही कहा फिर मैनें ही चुप्पी तोड़ी। “
“कैसे हैं घर में सब!. अम्मा, बाबूजी, छूटकी और रवि ??..सबको कहना जल्द आऊँगा। “
“उनलोगों को जो चाहिए लिखकर रखना..और बताना। अबकी आऊँगा तो सब लेता आऊँगा। “
“तुम्हें भी कुछ चाहिए तो अभी बोल दो इतना बोलते ही फफक कर रो पड़ी,
उसने रोते हुए अपनी जमा की हुई सारी शिकायत बयां कर दी।”
“क्या करुँ!,किसे अच्छा लगता है अपने लोगों से,अपने खुँटे से दूर रहना।”
“ये तो हमारी मजबूरी है, अगर अपने ही देश में रोजगार मिल जाता तो हम-आप जैसे भाई बंधू यहाँ क्यूँ आते..??”
“दूर तो है…बहुत दूर अपनों से..!!
“इस परदेश में काम तो मिल जाता है कम से कम, घर-परिवार चलाने के लिए पैसों की जरुरत कैसे पूरा हो पाएगा। “
“अब हम परदेशी हो ही गए तो क्या कर सकते हैं। “
“तुम्हारी पत्नी सुधा की शिकायत भी जायज है।
“सालभर में दो बार घर का मुँह देखते है…चंद दिन साथ लिए जाते हैं….फिर आधी-अधूरी सब छोड़कर वापस आना पड़ता है। “
“हमारे नसीब में उत्सव का कोई स्थान नही….अपने प्रदेश के भाईलोग है….उन्हीं के साथ खुश रह लेते है। “
इस बार मेरे बेटे ने भी अपने जन्मदिन पर आने को कहा है..वरना बात नहीं करुँगा।”
“कैसे समझाऊँ…उसे!!
हमारी अनुपस्थिति में घर को संभालना,बच्चों को समझाना…ये सब कितना कठिन काम है..औरतें वाकई परिवार की रीढ़ होती है।”
“इसका एहसास दूर रहकर समझ आता है। “
“सबकी शिकायत ढोते हैं। उनके पास भी यही तो होता है। उनकी शिकायतों पर ही तो हम भी जीवित है। “
“जितने दिन का साथ मिलता है..भरपुर कोशिश रहती है सबको खुश रखें।”
“आते-आते उनका सवाल..”फिर कब आना होगा…??तोड़ ही देता है अंदर तक। “
“हमजैसे लोग के सपने कुछ ज्यादा तो नहीं रहते , फिर भी जिंदगी भर उसी सपने को पूरा करने के लिए उसके पीछे दौड़ते रहना होता है। “
“ये पलायन तो हमारी नियति है छोटे..इसे कोई भी नही बदल सकता।”

