चर्चा में

सांसद फूलो देवी देश की मूल आत्मा कृषि और किसानी के प्रति आपके लगाव के आगे हम नतमस्तक हैं

(अरविन्द कुमार सिंह)

स्त्री ईश्वर के रचना संसार की अदभुत, अद्वितीय और सबसे खुबसूरत रचना है. वह फूल से भी ज्यादा नाजुक और फौलाद से ज्यादा कठोर है. वह नर और नारायण को भी जन्मती है. वह कभी युद्ध की नायिका है, तो परिवर्तन का आधार. समाज की धुरी है तो परिवार की मूलाधार है. वह रंगभूमि की जीनत है
तो सत्ता का केन्द्र. वह महाभारत भी है और रामायण भी. वह गार्गी भी है और अपाला भी. गांधारी और द्रौपदी भी और मंथरा भी. वह फूलन भी है और फूलो भी. जी हाँ, वही फूलो देवी जो बस्तर की आदिवासी समुदाय से आती हैं और देश की सर्वोच्च पंचायत की माननीया भी हैं. राज्य सभा सदस्य फूलो देवी इन दिनों इस देश की मूल आत्मा कृषि और किसानी में जुटी हैं. जिस देश में एक गाँव के सरपंच और प्रधान हो जाने पर लोग अपनी जड़ों से ऊपर उठकर कृत्रिम और हाईप्रोफाइल जीवनशैली जीने लगते हैं, इसी दौर में फूलो देवी, धान के खेत में रोपाई में व्यस्त हैं. ऐसे ही स्त्रियों और पुरूषों से इस देश के राजनीति में मौलिकता आ सकती है. और यही भारत की मूल पहचान और आत्मा है. मूल से मत कटो.वह आप की पहचान और देश की आत्मा की पहचान है.

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