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FIR से नाराज़ अरशद जमाल पहुंचे पालकी के पालिका, मांगा जवाब

मऊ ।पिछले दिनों कोविड-19 मामले में पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल व उनकी पत्नी सभासद शाहिना अरशद जमाल पर नगरपालिका के सफाई निरीक्षक ने कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस FIR से नाराज़ पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल दूसरे ही दिन मऊ नगरपालिका कार्यालय पहुंच गए। पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल नगरपालिका अध्यक्ष, तय्यब पालकी, ईओ नगरपालिका व एफआईआर दर्ज कराने वाले सफाई निरीक्षक को पत्रक देकर एफआईआर दर्ज कराने सम्बन्धित सवालों के जवाब तलब किए।

दिए गए पत्रक में पूर्व चेयरमैन ने कहा कि मेरे ऊपर जो आरोप लगाकर एफआईआर की गई है उस का प्रमाण दिया जाए, कि कब हमें किसी मौत की सूचना देने की बात कही गयी? प्रवासियों की सूचना देने के लिए हमें एक पत्र 22 जून को दिया गया, जबकि जिलाधिकारी द्वारा यह पत्र 12 जून को ही नगरपालिका को भेजा गया है। पत्रक में ये भी सवाल किया गया है के जिस व्यक्ति की मृत्यु के जनाजे सम्बन्धित सूचना को लेकर एफआईआर हुई है, उनकी मृत्यु उक्त पत्र मिलने से 3 दिन पह ले हुयी है। और पत्र हमें उनके अन्तिम संस्कार के बाद प्राप्त हुआ है।
पूर्व पालिकाध्यक्ष ने बताया कि उक्त व्यक्ति के अन्तिम संस्कार में मैं उपस्थित भी नहीं था और ना ही मेरी पत्नी उपस्थित थीं फिर भी मेरी पत्नी पूर्व चेयरपर्सन शाहिना अरशद जमाल पर मुकदमा दर्ज कराया गया है, जबकि पालिकाध्यक्ष मो तय्यब पालकी स्वयं अपने सहयोगियों के साथ जनाज़े में उपस्थित थे। 12 जून का पत्र 22 जून को सभासदों तक पहुंचाने जैसी घोर लापरवाही पर ईओ नगरपालिका सहित सम्बन्धित जिम्मेदारों और अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज कराने की बात कही।
पत्र में कहा गया है कि इस महामारी को लेकर वार्ड निगरानी समिति के अध्यक्षों के साथ न कभी बैठक की गई न ही उनको उनके अधिकारों और दायित्वों से ही अवगत कराया गया है। इतना ही नहीं पालिका के सभासदों या बोर्ड की भी कोई बैठक नहीं बुलायी जबकि यह एक गंभीर मामला है।
उन्होंने खाद्य एंव सफाई निरीक्षक को दिए गए पत्रक में कहा है कि वह तत्काल इस मुकदमे को वापस लें अन्यथा उनके खिलाफ न्यायालय में मानहानि का वाद प्रस्तुत किया जाएगा।
पत्रक की प्रति मंडलायुक्त आजमगढ़ और जिलाधिकारी मऊ को भी भेजी गई है।
पत्रक में नगर पालिका अध्यक्ष से भी इस घोर लापरवाही के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के साथ ही मुकदमा वापस लेने की बात कही है।
पत्रक देते समय पालिका सभासद जहीर सेराज, शहरयार और अफजल राना भी उपस्थित थे। पत्रक देने के बाद पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए दुख का इजहार किया और कहा के 3 महीने से दिन रात जनता की सेवा करने का यही इनाम दिया है, जिला प्रशास न और नगर पालिका ने। पूर्व चेयरमैन ने 22 लोगो पर गैंग्स्टर लगाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी और साफ आरोप लगाया था के ज़ुल्म और ना इंसाफी के खिलाफ आवाज उठाने वालो को उत्तरप्रदेश सरकार पुलिस की सहायता से डराना चाहती है। उन्होंने आह्वाहन किया के लोकतंत्र की रक्षा के लिए सवाल पूछे जाने के अधिकारों को सुरक्षित रखना होगा। पुलिस के दमन का ये सिलसिला जो 1975 के आपातकाल में शुरू हुआ था उसकी यादों को ये सरकार ताज़ा कर रही है। इस मौके पर पूर्व चेयरमैन में लोहिया की याद दिलाते हुए कहा के जब सड़के वीरान होजये तो संसद आवारा हों जाती है, इसका मतलब ये हुआ के जब लोग चुप रहने लगेंगे तो इंसाफ नहीं मिलेगा और सत्ता का दुरुपयोग होगा।

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