रचनाकार

रचनाकार

टूट गई उम्मीद बिखर गए सपने, दम तोड़ते परिजनों को देखते रह गए अपने

( कृष्णा भिवानीवाला ) दहशत भरी जिन्दगीकल तक सब कुछ थाहरा भरा, आज कैसी विरानीछाई हुई हैगांव गलियों, चौबारे में

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