मन व्यथित हैं, भावनाये अब हो रही आहत
( आशा साहनी ) अभी दौर नहीं आया है खुलकर सांस ले पायें,बिना मास्क के घर से हम बाहर निकल
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( आशा साहनी ) अभी दौर नहीं आया है खुलकर सांस ले पायें,बिना मास्क के घर से हम बाहर निकल
Read More( कृष्णा भिवानीवाला ) दहशत भरी जिन्दगीकल तक सब कुछ थाहरा भरा, आज कैसी विरानीछाई हुई हैगांव गलियों, चौबारे में
Read More( कामनी गुप्ता ) सुलग रही थी कहीं चिंगारी और वो यूं हवा देने आ गए,बात वतन की गरिमा की
Read More(पंकज शुक्ला “आवारा”) अपनी ज़िंदगी को लेकर एक ख्वाब लिखना चाहता हूं,अपने पाप- पुण्य का अनोखा हिसाब लिखना चाहता हूं।उलझी
Read More( रीनू शर्मा ) रूठ कर भी क्या करोगे ,क्या भला शिकवा करोगे । जब न होंगे हम यहाँ तो,फिर
Read More( राज़ अग्रवाल कवि ) एक नारी की पुकार….. क्या घूर रहे हो?वक्ष मेरे??लब मेरेया कमर मेरी?इन्हें देखउत्तेजित हो रहे?क्या
Read Moreपंकज शुक्ला (आवारा) आज मेरी उम्र 26 वर्ष है अगर सब कुछ सही रहा और किसी बीमारी या दुर्घटना से
Read More( डॉ.सरला सिंह “स्निग्धा” ) आज ही 10 बजे से बी.एड का पेपर है और साथ में नन्हे-नन्हे दो बच्चे
Read More(केदारनाथ) “अबे ओ ! इधर आ तू ।” दो -तीन होमगार्ड उस रिक्शेवाले की तरफ लपके। रिक्शे वाले ने डरते
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