गर जुदा हम तुम हुए तो, याद वो लम्हा करोगे
( रीनू शर्मा )
रूठ कर भी क्या करोगे ,
क्या भला शिकवा करोगे ।
जब न होंगे हम यहाँ तो,
फिर किसे रुसवा करोगे ।
दर्द तड़पन साथ हैं तो,
किस तरह तनहा करोगे ।
पूछते हो हाल क्यों अब,
जान कर भी क्या करोगे ।
गर सिला ये है वफ़ा का,
फिर ज़फा का क्या करोगे ।
गर जुदा हम तुम हुए तो ,
याद वो लम्हा करोगे ।
आज ‘रीनू’ फिर ख़फ़ा है,
बीसवां दसवां करोगे ।

