रचनाकार

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हमने तृण में, पत्थर में, देवों को देखा, मेरु वृक्ष नद-निर्झर को प्राणों से पूजा

■ ओमा The अक्© अपनी विरासतअपनी संस्कृतिसंस्कार कीसारी निर्मितिसकल जगत कीसेवा और सत्कारहमारा संस्कार हैशुभता का आधारहमारा संस्कार हैजड़ चेतन

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सुनिल चौरे ‘उपमन्यु’ द्वारा जितेंद्र शिवहरे की कहानी ‘दौराहा’ की समीक्षा,

दौराहा…प्रेम और कर्तव्य का-कहानी कहानीकार–जितेंन्द्र शिवहरे (इंदौर) आधारित–प्रेम और कर्तव्य पर समीक्षक- सुनिल चौरे ‘उपमन्यु’ (खंडवा) जितेंन्द्र शिवहरे द्वारा लिखीत

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