रचनाकार

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ग़ज़ल : बेरुखी ऐसी भी न हो चिलमन भी हो और तन्हाई भी मिले, हम फूलों की चाह करें और चमन में बस यूं कांटे ही मिले

( कामनी गुप्ता ) बेरुखी ऐसी भी न हो चिलमन भी हो और तन्हाई भी मिले,हम फूलों की चाह करें

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‘मैं आदत बनी रहूँ तेरी बस ये काफ़ी है, हर बार प्यार का ईजहार ज़रूरी नहीं’

■ बरसाते पानी की फूंहारों के बीच कविताओं ने जमाया रंग ■ कवियों ने गूगल मीट कवि सम्मेलन में हृदयस्पर्शी

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