रचनाकार

हमारी आत्मा है काशी, अयोध्या, मथुरा

धीरु भाई ( धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव )

बेवजह सिर पे अदावत का आसमान न ले।
किसी भी हाल में यूपी का इम्तिहान न ले।

हमारी आत्मा है काशी, अयोध्या, मथुरा,
बांटकर इनको हमी से हमारा प्रान न ले।

जमीन थरथरा जाएगी लब के हिलने से,
हृदय प्रदेश को नीरव का देश जान न ले।

अभी सागर में कई पोत हैं उलझे तेरे,
खरीद अपने लिए एक नया तूफान न ले।

कई मतभेद हैं आपस में सही है लेकिन,
गैर के वास्ते भी इसको सही मान न ले।

हमारे गुल्लकों को हमसे लूटने वाले,
हमारे खेत से जबरी हमारा धान न ले।

सजग रहो अभी दिल्ली में हैं अस्सी भाई,
हमें लड़ा के कोई छीन ये पहचान न ले।


दो टूक, 8 जून 2021

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