कविता : ” बारिश का मौसम”
आशु कवि”-के.पी.चौहान”आरजू”
जब बारिश होती है
छाता बेचने वाला आता है
छाते बेचता हुआ जाता है
पापी पेट के लिए वह
पैसा कमाता है
छाते बेचता हुआ जाता है
छाते बेचने की चाह में
भूख मिटाने की आह में
धन दौलत वालों की राह में
स्वयं छाता खोल नहीं पाता है
कारण पूछने पर वह
जवाब नहीं दे पाता है
या मतलबी दुनिया को
समझ नहीं आता है
की छाते बेचने वाला आखिर क्यों ?—–भीग जाता है
जब बारिश का मौसम आता है
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आशु कवि”-के.पी.चौहान”आरजू”
गुरान-सांवेर-इंदौर-(म.प्र.)
Mob-9826031513

