रचनाकार

हमने तृण में, पत्थर में, देवों को देखा, मेरु वृक्ष नद-निर्झर को प्राणों से पूजा

■ ओमा The अक्©

अपनी विरासत
अपनी संस्कृति
संस्कार की
सारी निर्मिति
सकल जगत की
सेवा और सत्कार
हमारा संस्कार है
शुभता का आधार
हमारा संस्कार है
जड़ चेतन से प्यार
हमारा संस्कार है…!

कोई गोरा
कोई काला
ऊंच नीच क्या
सब में समता
वनचर नभचर
जलचर प्रस्तर
तृण वृक्षों से
अपनी ममता
सबसे सम-व्यवहार
परम स्वीकार
हमारा संस्कार है
शुभता का आधार
हमारा संस्कार है
संस्कार है…!

रण में रणचण्डी
और दुर्ग भेदती दुर्गा
गणपति के मस्तक पर
शोभित कोमल दूर्वा
अहंकार पर वार
प्रीत निवछार
हमारा संस्कार है
शुभता का आधार
हमारा संस्कार है
संस्कार है …!

हमने तृण में पत्थर में
देवों को देखा
मेरु वृक्ष नद-निर्झर को
प्राणों से पूजा
करुणा का विस्तार
नमो-ओंकार
हमारा संस्कार है
जड़ चेतन से प्यार
हमारा संस्कार है
शुभता का आधार
हमारा संस्कार है…!!

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