रचनाकार

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फ़िदा भी न क्यूँ हो ये ‘हरिलाल’ तुझपे, ग़ज़ल तेरे जलवे निराले बहुत हैं

हरिलाल राजभर… गलतफहमियाँ जो भी पाले बहुत हैं,पड़े जह्न में उनके छाले बहुत हैं । सदा तंज कसना ही जिनकी

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विकास जब विवेक को लालच में फंसाएगा, यह दिन देखना तुम बहुत ही जल्दी आएगा

@ अभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली से… एक दिन होगे कंकरीट के जंगल,पेड़ बीच पाषाण किला बन जाएगा।आस पास होगे इतिहास बताने

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इश्क़ में इक पढ़ाकू लड़की करने लगी आवारगी, इश्क़ में इक आवारा लड़का पढ़ाई करने लगा

उमंग युवा कवि सम्मेलन पटेल काॅलेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूटशन रालामंडल में हुआ सम्पन्न कुमार अशोक के श्रृंगार रस से भरे

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