स्त्री को सिर्फ़ इंसान रहने दो ना…
@ अभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली… नन्ही थी कन्या मानकरपूजी गई …..बड़ी हुई सरस्वती बनाने लगेफिर अन्नपूर्णा सी रसोई…बताने लगे……पति के घर
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@ अभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली… नन्ही थी कन्या मानकरपूजी गई …..बड़ी हुई सरस्वती बनाने लगेफिर अन्नपूर्णा सी रसोई…बताने लगे……पति के घर
Read More✍🏻 मीना सिंह राठौर, नोएडा उत्तर प्रदेश से… आज कुछ नही है मेरे पास लिखने के लिए,शायद मेरे हर लफ्ज़
Read More@ मनोज कुमार सिंह… एकबार विष पीकर नीलकंठ हो गये थे शिव,हम रोज़ जहर पीते हैं फिर भी नीले नहीं
Read More@ पूनम गुप्ता, खिदिरपुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल… माँ तुम्हें कोटि- कोटि नमन।चाहती हूँ चलनातुम्हारे नक़्शे कदम।पर जरूरी नहीं हो सहीतुम्हारे
Read More@ अंतिमा सिंह “गोरखपुरी”… मादक पवन लेके महकी है बगिया,दिन-दिन बढ़ती बसंत की बहार है।।बौर से लदाये बौराय गये आम्र-वृंद,झूम-झूम
Read More@ प्रमोद कुमार अनंग… यह देश नहीं गद्दारों का।यह देश है रिश्तेदारों का।।विविध बोलियां भाषाएं।संस्कृतियों संस्कारों का।।ऋषियों मुनियों का देश
Read More@ रिया अग्रवाल, फरीदाबाद हरियाणा से… आंखों में आसूं थेया गंगा का पानीछोड़ रहे थे जब हमचौखट पुरानी.. भीतर कुछ
Read Moreडा. प्रमोद कुमार अनंग ठोकरें खाकर गिरा, फिर भी खड़ा हूं।‘बाप हूं ‘ तुमको बचाऊंगा, अड़ा हूं।।चोट लग जाए, न
Read More@ अशोक कुमार यादव… पिता प्रतीक है कर्म कापिता प्रतीक है धर्म कापिता है परमेश्वर के रूपपिता प्रतीक है मर्म
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