कविता : संघर्ष
@ रंजना यादव, बलिया से… हां सुनोअब मेरे लिये त्यौहार मायने नही रखतेमायने रखती है तो अब बस वो मंजिलजिसके
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@ रंजना यादव, बलिया से… हां सुनोअब मेरे लिये त्यौहार मायने नही रखतेमायने रखती है तो अब बस वो मंजिलजिसके
Read More@ रंजना यादव, बलिया से… चलो आज फिर एक नई शुरुआत करते हैदेर हो चुकी है बहुतपर आज से ही
Read Moreदेश का युवा बोल रहा है, वंशवाद अब डोल रहा हैजिसके लिए मैंने की लड़ाई, जेल गया और लाठी खायीआज़ादी
Read More@ शब्द मसीहा केदारनाथ… यूक्रेन में फँसे बेटे ने अपनी माँ को फोन किया, “हेलो माँ! आपको नमस्कार करता हूँ।
Read More@ रंजना यादव… जब बैठे बैठे कुछ करने को नहीं सुझता है तब, बस यूँ ही कुछ दूर कविताओं के
Read More@ मौलिक्षा सिंह… जिसे सोच कर मुस्कुरा दो तुम, मैं वो स्मृति होना चाहती हूं,मैं तुम्हें बनाकर हृदय पिया, तुम्हारी
Read Moreसमीक्षक : डा. राजकुमारी पुस्तक – मंटो न मरबलेखक – केदरनाथ शब्द मसीहाप्रकाशन -मचान दिल्लीसमीक्षक डॉ. राजकुमारीपेज़ संख्या -114मूल्य -150
Read Moreमेरी कलम से…आनन्द कुमार गजब तुम्हारी लीला है,गजब तुम्हारी शान,हे राजनीति के राजहंस,तेरी अजब-गजब पहचान,लोकल नेता तो बदनाम झूठे हैं,असल
Read More@ भास्कर राय… तुम मिले तो नईइक कहानी मिलीहिज्रे गुल को नईजिंदगानी मिली !दर बदर घूमतेथे कभी जो यहांउन्हें प्यार
Read More@ डा. प्रमोद कुमार अनंग… “मुल्क हमारा भक्तों का है” “मुल्क हमारा भक्तों का है”आंधी आवे या तूफान।डटा रहेगा हिंदुस्तान।।खाट
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