कविता! “मुल्क हमारा भक्तों का है”

@ डा. प्रमोद कुमार अनंग…
“मुल्क हमारा भक्तों का है”
“मुल्क हमारा भक्तों का है”
आंधी आवे या तूफान।
डटा रहेगा हिंदुस्तान।।
खाट खड़ी होगी दुश्मन की।
जाएगा वह कब्र – मसान।।
उरियाही करते रहते हैं।
धूर्त चीन व पाकिस्तान।।
दुनियाभर को भ्रमित कर रहा।
कितना झूठा है बेईमान।।
नीयत दोनों की खराब है।
बंटा रहा है केवल ध्यान।।
व्याख्या गलत कर रहे द्रोही।
खोल रहे गीता – कुरान।।
रखते हैं प्रचंड शक्ति हम।
तोड़ेंगे उनका अभिमान।।
तिरंगा ऊंचा रहे हमारा।
बढ़ती रहे हमारी शान।।
तुम्हें जला कर रख देंगे हम।
बच्चा – बच्चा है हनुमान।।
मुल्क हमारा है भक्तों का।
अल्ला , ईसा , औ भगवान।।…”अनंग “
“जी लो सीना तान”
वीर -पुरूष इतिहास रचाने आते हैं।
दिग्दिगंत का भार उठाने आते हैं।।
कठिन डगर आसान बनाने वाले ये।
कमजोरों को पार लगाने आते हैं।।
शूरवीर इनको आजादी से मतलब।
तीर और तलवार चलाने आते हैं।।
मातृभूमि से मतलब इन दीवानों को।
हृदयों पर अधिकार जमाने आते हैं।।
योद्धा कभी नहीं छिपते हत्यारों से।
हथियारों पर धार चढ़ाने आते हैं।।
सवा लाख पर एक अकेला काफी है।
वसुंधरा का बोझ हटाने आते हैं।।
कुलकलंक बन जाता है जो जीवन में।
उनका नाम निशान मिटाने आते हैं।।
कफ़न बांधकर चलने की आदत इनकी।
भारत मां की शान बढ़ाने आते हैं।।
स्वाभिमान की रक्षा में मिट जाना है।
यही है हिंदुस्तान बताने आते हैं।।
डरकर कायर बनकर जीना क्या जीना।
जी लो सीना तान सिखाने आते हैं।।…”अनंग “
“दुःखी जन-मन यहां फिर भी”
बड़ा बेआबरू होकर , वो मन की बात करता है।
नहाकर खून से वो , आचमन की बात करता है।।
खिलौनों की तरह वो , खेलता है भावनाओं से।
भरोसा तोड़कर , निष्ठा – लगन की बात करता है।।
निवाला छीन कर तड़पा रहा है , बेचने वाला।
अक्सर मित्र और भाई -बहन , की बात करता है।।
दिखाया स्वप्न दूनी आय , करने का भरोसा था।
कुचलता है किसानों को , सहन की बात करता है।।
वो नफरत और घृणा का , नया संसार रचता है।
इशारों में सदा उनके , जलन की बात करता है।।
अवसर छीनकर हाथों से , धनिकों को सुखी करता।
झोपड़ियों को जलाकर , वो गगन की बात करता है।।
दुःखी है न्याय की देवी , दुःखी है कलम का साथी।
दुःखी जन-मन यहां फिर भी,नमन की बात करता है।।…”अनंग “
“अश्रुधारा हूं मैं “
क्या पता है तुम्हें बेसहारा हूं मैं।
बिन रुके बह रहा अश्रुधारा हूं मैं।।
मैंने इतने थपेड़े सहे हैं मगर।
मैंने बांटी है हिम्मत किनारा हूं मैं।।
है चमक – रोशनी एक पहचान हूं।
टूटकर चल पड़ा एक तारा हूं मैं।।
मैंने खोया है अपनों को पर हूं खड़ा।
भावनाओं से अपने ही हारा हूं मैं।।
मूल्य को जी रहा हूं जहर पी रहा।
इसलिए हूं अकेला बेचारा हूं मैं।।
साफ कहने की रहने की आदत मुझे।
इसलिए लोग कहते हैं खारा हूं मैं।।
जिंदगी है सदा दूसरों के लिए।
बेसहारों का केवल सहारा हूं मैं।।…”अनंग “

