रचनाकार

कहानी : दूध नहीं लजाऊंगा

@ शब्द मसीहा केदारनाथ…

यूक्रेन में फँसे बेटे ने अपनी माँ को फोन किया, “हेलो माँ! आपको नमस्कार करता हूँ। यहाँ मेरे और साथियों के बहुत बुरे हालात हैं। जो साथी पोलैंड की सीमा पर गए हैं, उन्हें भी अभी अंदर जाने का और सीमा पार करने का मौका नहीं मिला है। बर्फ ऊपर से गिर रही है, और वहाँ की पुलिस का रवैया उनके प्रति बहुत ज्यादा ख़राब है।” बेटा कहते हुए सुबकने लगा।

“बेटा! तू बिल्कुल भी मत डर, धीरज से काम ले। मैं और तेरे पापा ही नहीं बल्कि तेरे दादा-दादी जी भी टी.वी. के सामने बैठे हुए हैं। तुम्हें बचाने के लिए बहुत सारे इंतजाम किए जा रहे हैं। मैंने मंदिर में जाकर मन्नत भी माँगी है बेटा। बस जैसी एडवाइजरी वहाँ पर सरकार तुम्हें दे रही है, वैसा ही करो।” माँ ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा।

“माँ! अब लगता है कि बहुत देर हो चुकी है, यहाँ से बचकर निकलना बहुत मुश्किल है। हम दो-चार लोग तो हैं नहीं, हजारों लोग हैं। इस देश के अलग-अलग हिस्सों में हैं। सीमा तक पहुँचने का कोई साधन नहीं है, और जो लोग सीमा तक पहुँच भी गए हैं, उनके लिए बॉर्डर बंद कर दिया गया है।” बेटे ने कहा।

“तू चिंता मत कर, सरकार दिन रात लगी हुई है। हर चैनल पर बार-बार बदलकर मैं देखती हूँ, हर चैनल यही कह रहा है कि सरकार अपने छात्रों को बचाने के लिए बहुत मेहनत कर रही है। मुझे भरोसा है कि तू वापस आएगा बेटा।” माँ बेटे को ढांढस बँधाते हुए कहती है।

“माँ! तुम्हारा सपना था कि मैं अपने परदादा जी की तरह इस देश के लिए काम करूं, इंजीनियर बनकर आऊँ अपने देश की सेवा के लिए।”

“हाँ, बेटा।”

“मुझे माफ कर देना माँ। अब शायद मैं तुमसे नहीं मिल पाऊंगा, लेकिन मैंने भी इस देश का नमक खाया है। मैंने यहाँ पर औरतों को बंदूके चलाते हुए देखा है, बच्चों को निहत्थे टैंकों के सामने खड़े होते हुए देखा है। माँ! मैं अब इस देश के लिए लडूंगा। अपने दोस्तों के लिए लडूंगा। मुझे माफ कर देना, मैं वापस नहीं आ सकूंगा। अगर अपने दोस्तों को बचाते हुए मैं लड़ाई में काम आ गया, तो तू रोना मत, किसी को दोष भी मत देना। शायद भगवान ने मेरी किस्मत में ऐसा ही लिखा हो। मुझे मेरे देश का नाम ही नहीं बल्कि अपनी माँ का भी नाम ऊंचा रखना है।” बेटे ने अपना फैसला सुना दिया था।

“नहीं बेटा, तुझे सरकार जरूर बाहर ले आएगी। तू अपने देश की सेवा के लिए वापस आएगा। तो ऐसा फैसला मत कर बेटा।” और माँ रोने लगी।

“माँ! भरोसा रखो, तुम्हारा दूध नहीं लजाऊंगा।” और बेटे ने फोन काट दिया।

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