रचनाकार

स्त्री को सिर्फ़ इंसान रहने दो ना…

@ अभिलाषा अग्रवाल, दिल्ली…

नन्ही थी कन्या मानकर
पूजी गई …..
बड़ी हुई सरस्वती बनाने लगे
फिर अन्नपूर्णा सी रसोई…
बताने लगे……
पति के घर में आते ही
लक्ष्मी मान लिया…..
फिर पत्नी बन गई..
बहू बन गई…….
फिर माँ के नाम पर पूजी गई
अगर वो नहीं बन पाई तो
एक मामूली स्त्री ……..
ज्यादा उम्मीदे देवी बनाकर
हर पल की जाती है…
छीन लिया जाता है उसका
अस्तित्व बस उसे एक इंसान
रहने दो ना वो क्या चाहती है
ये उसे ही कहने दो ना….!!!!

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