कविता: पिता आत्मज्ञान गुरु है, पिता से जीवन शुरू है

@ अशोक कुमार यादव…
पिता प्रतीक है कर्म का
पिता प्रतीक है धर्म का
पिता है परमेश्वर के रूप
पिता प्रतीक है मर्म का
पिता आत्मज्ञान गुरु है
पिता से जीवन शुरू है
पिता भाव तन्मयता है
पिता संघर्ष मैदान कुरु है
पिता सहज सुगम रास्ता
पिता को कुटुंब से वास्ता
पिता अन्नदाता जगत का
पिता से है अखंडित नाता
पिता है विद्या चेतना बोध
पिता है विज्ञान नवीन शोध
पिता है नाविक सदन का
पिता घोर तिमिर में है कौंध
पिता उन्मुक्त गगन के सूर्य
पिता है कठोर और माधुर्य
पिता सुख,आनंद खजाना
पिता है जीवन प्रेम प्राचुर्य
कवि- अशोक कुमार यादव
पता- मुंगेली, छत्तीसगढ़ (भारत)
पद- सहायक शिक्षक
पुरस्कार- मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण ‘शिक्षादूत’ पुरस्कार 2020
प्रकाशित पुस्तक- ‘युगानुयुग’

