हर साल रावण जलाने से क्या फायदा, जब बेटीयों के इज्जत के साथ खेलने वाले राक्षस यूं ही खुलेआम घूम रहे हैं
(रोशनी जायसवाल)
आज फिर एक नारी कि इज्जत को सरेआम निलाम किया गया क्या ऐसे ही महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते रहेंगे क्या कभी नारी सुरक्षित नहीं होगी कहा है वो लोग जो नारी को ग़लत ठहराते हैं क्या आज उस बेटी की जगह हमारे सरकार या हमारे किसी नेता, अफसर की बेटी होती तो क्या अब तक ये लोग ऐसे चुप्पी साधे हुए होते क्या अपराधी यूं ही रिहा होते आज भारत की हर एक बेटी के मन में यही सवाल है कि क्या वो अब इस माहौल इस परिवेश में सुरक्षित है ? आज हर महिला इस डर में जी रही है कि कहीं उसके साथ कुछ अनहोनी हो न जाए। क्या सरकार अब भी चुप रहेगी और बेटियों के इज्जत को निलाम होने देगी तो यहां सरकार के द्वारा शुरू किया गया अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ असफल होता नजर आ रहा है और बेटियों का जीवन अन्धकार में नजर आ रहा है। जहां ना तो वो खुद के अन्दर के हुनर को पहचान पायेगी और ना ही किसी अजनबी से आंख मिला पायेगी तो बेटियां कैसे इन हैवानियत से लड़ पायेगी। जब उनकी जड़ें ही कमजोर हो जायेगी हमारे देश में नवरात्रि आने को है जगह जगह मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कि जा रही है और सड़कों पर बेटियों कि इज्जत के साथ खेला जा रहा है ।
हमारे देश में असली दुर्गा पूजा और दशहरा तो उस दिन होगा जब ये राक्षसों का वध करके हर नारी सुरक्षित बिना हिचक इस समाज से अपनी आंखें मिला पायेगी और अपने कदम को आगे बढ़ा पायेगी । वरना हर साल रावण को जलाने का क्या फायदा जबकि हमारे आस पास की बेटीयों के इज्जत के साथ खेलने वाले राक्षस यूं खुलेआम घूम रहे हैं।

