उत्तर प्रदेश

विधानसभा चुनाव 2022: भाजपा के बेजोड़ ‘वर्किंग सिस्टम’ से पिछड़ गया विपक्ष

● यूपी चुनाव में ‘फर्क साफ है’ बना बड़ा अभियान

● पिछली सरकारों से तुलना करके जनता को फर्क महसूस करा रही भाजपा

विजय कुमार गुप्ता
लखनऊ

यूपी में चुनाव तो लड़ने के लिए कई पार्टियां मैदान में हैं। लेकिन जो तैयारी भाजपा की है वहां तक अभी कोई पार्टी नहीं पहुंची है। जब सपा-बसपा अपना सम्मेलन कर रहे थे तब भाजपा बूथ स्तर कर अपनी व्यूह रचना कर चुकी थी। भाजपा अब अपने एजेंडे के साथ मैदान में उतर चुकी है। पिछली सरकारों में यूपी की जनता को क्या मिला और योगी सरकार में जनता को क्या मिल रहा है। इस फर्क को दर्शाते हुए होर्डिंग्स के साथ मैदान में सबसे आगे निकल चुकी है।
भाजपा अपने सांगठनिक जिलों में होर्डिंग्स लगवा चुकी है। इसमें संदेश साफ है ‘फिर एक बार भाजपा सरकार’।

भाजपा की वर्किंग सिस्टम जमीनी स्तर पर जड़ों को इतनी गहरी कर चुकी है कि विपक्षी दलों को वहां तक पहुंचने में काफी लंबा सफर तय करना पड़ेगा। भाजपा पिछली सरकारों के कामकाज की शैली को जनता के सामने लाने के लिए सामाजिक सम्पर्क शुरू किया। जिसका असर ये हुआ कि समाज के 27 वर्गों का व्यापक स्तर पर सम्मेलन किया। सम्मेलन में सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं की भागदारी के बीच जिन विषयों पर चर्चा हुई वो अब विचार के रूप में चौराहों औऱ नुक्कड़ों पर सुनने को मिल रहे हैं। इन सम्मेलनों की खास बात ये थी कि योगी ने खुद पिछली सरकारों और भाजपा सरकार में कार्यशैली का फर्क बताया था।
जिसका असर ये हुआ कि सम्मेलन में शिरकत करने वाले उन इलाकों पहुंचे जहां विपक्षी दलों की पैठ थी। अब क्षेत्रीय क्षत्रपों के क्षेत्र में दबे पांव भाजपा पहुंच गई है। इन सबके पीछे प्रचार की एक बड़ी टोली लगी हुई है। जो माइक्रो लेवल पर प्रचार का कार्य कर रही है।
अपने वर्किंग सिस्टम की बदौलत भाजपा अंदर ही अंदर सपा औऱ बसपा के उन किलों में सेंध लगाने के लिए पहुंच चुकी है। जो पिछले चुनावों में अभेद्य थे।

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