ग़ज़ल : आवास अब मिलेगा नहीं, आस छोड़कर आ फिर किसी जुगाड़ से छप्पर बनाएँ हम
✍️ हरिलाल राजभर ‘कृषक’… अब क्यूँ न जादू इश्क़ का ऐसा चलाएँ हम वो चैन की लें नींद तो सपनो
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✍️ हरिलाल राजभर ‘कृषक’… अब क्यूँ न जादू इश्क़ का ऐसा चलाएँ हम वो चैन की लें नींद तो सपनो
Read More@ हरिलाल राजभर… चला कब्र में सोने वादा तुम्हाराबचा क्या बताओ इरादा तुम्हारा किये जाते हो खूब मौकापरस्तीन है ज़ुल्म
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