रचनाकार

मैं इसीलिए एडिटर हूँ

शब्द मसीहा केदारनाथ…

“लीजिये सर, आज की बलात्कार की रिपोर्ट ।” रिपोर्टर ने एडिटर को रिपोर्ट देते हुए कहा।

“ये क्या है ?” एडिटर हेडिंग देखकर चिल्लाया।

“सर! बलात्कार की साइड पर गया उस लड़की से मिला और रिपोर्ट तैयार की है। बहुत सदमें में थी, बड़ी मुश्किल से मिल पाया हूँ । माँ-बाप का रो-रोकर हाल बुरा है । वही सब मैंने लिखा है।” रिपोर्टर बोला।

“वो सब ठीक है, लेकिन हेडिंग को बदलो , इसे लिखो एक दलित लड़की से बलात्कार । ये भी कोई हेडिंग है कि जाति के नशे में बलात्कार ?” एडिटर ने कहा।

“माफ कीजिये सर , हम कितना गिरेंगे ? हम शब्दों के बलात्कार का खेल कब तक प्रमोट करेंगे ? आप उसी लड़की और उसकी जाति को शर्मिंदा कर रहे हैं, जिसका दोष है उसको क्यों नहीं ?” रिपोर्टर बोला।

“मैं इसीलिए एडिटर हूँ । तुम चाहो तो कल से अपने लिए कोई और अखबार ढूंढ सकते हो ।” एडिटर ने रिपोर्ट उसकी तरफ फेंकते हुए कहा।

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