रचनाकार

तिरंगे का सम्मान हर दिन करें

@ रोशनी जायसवाल, मऊ…

हमारे भारत देश में आज हर कोई शौर्य गाथा गा रहा है, तो पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है आज बच्चे से लेकर बूजुर्ग लोगों के हाथों हमारा तिरंगा लहरता नजर आ रहा है हम जिस गली, जिस नुक्कड़, जिस घर के सामने से गुजर रहे हैं हर तरफ हमारा झंडा आसमान में लहरा रहा है यह देखकर आज हम सभी लोगों का मन गर्व से गदगद हो उठ रहा है। पर एक बात कही ना कही मन को कचोट रही है
जिस झन्डे का आज हम इतना सम्मान कर रहे हैं, प्यार से सजा रहे हैं हर तरफ इसे लहरा रहे हैं तो क्या स्वतन्त्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के दूसरे दिन भी हम यही सम्मान यही विश्वास हम अपने भारतीय ध्वज के लिए दिखा पायेंगे ?
क्योंकि कल ना तो आपको सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाकर सबको दिखाना है और ना ही देश के प्रति देशभक्ति में डूबते हुए नजर आना है ।
आज हम जहां अपने देश के प्रति दृढ़ संकल्प लेते हैं तो फिर कल क्यूं हमारा राष्ट्रीय ध्वज सड़कों पर नजर आता है ? जिस भारत मां से हम इतना प्यार करते हैं जिस भारत मां के लिए हमारे वीर सैनिक रोज शहीद हो जाते हैं उसी भारत के बेटियों को निर्वस्त्र सड़कों पर घूमाया जाता है ? क्यों हर दिन हम हम आपसी भाईचारे को मिटा रहे हैं यहां ना तो सभी हिन्दू गलत है ना ही सभी मुस्लिम और इस तथ्य को हमारा राष्ट्रीय ध्वज भी प्रमाणित करता है क्योंकि जब तक केसरिया में हरा ना मिले हमारा राष्ट्रीय ध्वज अधूरा है और बीच में वो सफ़ेद रंग हमारे भाईचारे शान्ति का प्रतीक है और अशोक चक्र की वो चौबीस तीलियों की तरह हम सब अलग अलग धर्म,वर्ग ,समुदाय में बंटे हैं पर हम सब एक हैं और हमारी पहचान सिर्फ एक सच्चे भारतीय के रूप में है ।मैं किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करती पर अगर हमारे देश में भगत सिंह जैसे वीर है तो एपीजे अब्दुल कलाम साहब जैसे देश के प्रति समर्पित होने वाले सच्चे देशभक्त भी है हमारा देश आजाद तो 77 वर्ष पहले हो गया पर वो सच्चे मन से आज भी आजाद नहीं है तात्या टोपे, सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह, टीपू सुल्तान, महात्मा गांधी अशफाक उल्ला खां, सुखदेव, राजगुरु, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सर सैयद अहमद बहादुर शाह ज़फर जैसे अनेकों महापुरुषों ने एकता दिखाकर हमारे भारत देश को ब्रिटिश सरकार से आजाद कराया था क्या इसी दिन के लिए कि हम आपस में लड़कर आपसी भाईचारे को मिटा कर उनके कुर्बानी को आज कहीं दफ़न कर दे हमारा देश तो वो है जहां रमज़ान में राम तो दीपावली में अली है , हमारे देश में नारियों को मां दुर्गा का रूप माना जाता है और मां दूर्गा सनातन धर्म की शक्ति का प्रतीक है क्योंकि सृष्टि का निर्माण ही मां दुर्गा से हुआ है वहीं दूसरे समुदाय इस्लाम के कूरआन में भी स्पष्ट रूप से यह लिखा गया है कि क़ुरआन के शब्द हैं:

‘‘ज़िना ( बलात्कार)के क़रीब भी न फटको’’ (17:32)
अगर कोई मुसलमान इस काम को करता है तो वह इसकी सज़ा से नहीं बच सकता, चाहे दुनिया में सज़ा पाए या परलोक में।
मैं अपने शब्दों को यही कहते हुए विराम दूंगी कि जैसे आप आज अपने भारतीय ध्वज को सम्मान दे रहे हैं हर रोज दीजिए और आज एक दृढ़ संकल्प लीजिए कि हर नारी पूजनीय है चाहे वो किसी भी धर्म समुदाय से ताल्लुक रखती हो और हम सब इस धरती के मालिक नहीं है क्योंकि जब बुलावा आयेगा उनका तो सारे कर्मों का हिसाब होगा ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *